
“नरेंद्र मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने अपमान का बदला ज़रूर लेते हैं।” यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि रोहतास कांग्रेस के नेता और डेहरी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी डॉ. शैलेश सागर कह रहे हैं।
डॉ. शैलेश सागर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “जिस प्रकार से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे ‘सरेंडर’ कर दिया है, वह इस बात की ओर इशारा करता है कि उनका तथाकथित 56 इंच का सीना बस गरीबों, वंचितों, दलितों, मुसलमानों और देश के किसानों के सामने ही तनता है।”
चर्चित एप्स्टीन फाइल में आए नरेंद्र मोदी के नाम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “विदेश जाकर वे नतमस्तक हो जाते हैं, बस ट्रंप को खुश करने के लिए नाचते-गाते हैं। और अब यह ट्रेड डील।”
उन्होंने आगे कहा, “इस ट्रेड डील के जरिए नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों और व्यापारियों को छला है, और देश के किसानों से तो उन्होंने बदला ही लिया है।”
बदले के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया, “2014 से आज तक नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ा अपमान यही रहा, जब अडानी-अंबानी के फायदे वाले ‘तीन काले’ कृषि कानूनों को उन्हें वापस लेना पड़ा। भले ही उस दिन शहीद किसानों की आत्माओं को शांति मिली हो, लेकिन इस कानून को वापस लेना नरेंद्र मोदी के जीवन का सबसे बड़ा अपमान बन गया। उन्होंने उसी समय (कानूनों को वापस लेते समय) ठान लिया था कि वे देश के गरीब, पिछड़े किसानों से इस तथाकथित अपमान का बदला लेंगे। और आज, लगभग 4 साल बाद, अमेरिका के समृद्ध किसानों के लिए भारतीय बाजार का दरवाजा खोलकर उन्होंने एक प्रकार से किसानों से अपनी उस बेइज्जती का बदला ले ही लिया है।”
डॉ. सागर ने कहा, “आज अमेरिकी किसान भारत के किसानों का उन्हीं के प्रधानमंत्री द्वार गला घोंटने का जश्न मना रहे हैं। अगर यह ट्रेड डील पूरा हुआ, तो कल तक सूखे, कर्ज और खराब पैदावार के कारण आत्महत्या करने वाले किसान अब अमेरिकी किसानों के कारण आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। अगर प्रधानमंत्री ने इस ट्रेड डील को अभी नहीं रोका, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन करेंगे।”
अपनी बात का अंत करते हुए डॉ. शैलेश सागर ने कहा, “आज देश का हर तबका त्राहिमाम कर रहा है। देश में आर्थिक गरीबों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। सार्वजनिक मंचों से जहां हमारे जननायक राहुल गांधी गरीबों की आय बढ़ाने की, स्कूल-कॉलेजों की, अमन और चैन की बात करते हैं, नरेंद्र मोदी देश के 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन बांटने को उपलब्धि की तरह गिनाते हैं, बिहार में अरवा-उसना चावल की बात करते हैं, दलितों-मुसलमानों के प्रति द्वेष फैलाते है।”
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