विशेष रिपोर्ट | जन आक्रोश इनवेस्टिगेशन टीम
क्या हो अगर एक सुबह आप उठें और पता चले कि आपकी बरसों की जमा पूंजी पर बैंक ने ताला लगा दिया है? वजह? पुलिस कहती है कि आपके खाते में ‘गलती’ से पैसे आ गए हैं, लेकिन बैंक स्टेटमेंट चीख-चीख कर कह रहा है कि वो पैसा कभी आया ही नहीं!

यह कहानी किसी एक बदनसीब की नहीं, बल्कि एक सोची-समझी “डिजिटल तानाशाही” की है, जिसका खुलासा डेहरी-ऑन-सोन, दिल्ली से लेकर अन्य नगरों में हुआ। ‘जन आक्रोश’ के संज्ञान में आए सिलसिलेवार मामलों ने यह साबित कर दिया है कि कैसे साइबर सेल की संदिग्ध कार्यप्रणाली और बैंक अधिकारियों की लापरवाही आम आदमी की जमापूंजी को निगल रही है।
जब दो पीड़ितों को बड़ी जीत मिली है तब दो ने नई जंग का ऐलान किया है, तो आइए जानते हैं इस पूरे खेल की शुरुआत हमारे संग्यान में कहाँ से आई।
1. शुरुआत: इम्तियाज अंसारी और ‘भूतिया ट्रांजेक्शन’ का रहस्य
इस मुहिम की नींव जुलाई 2023 में पड़ी, जब डेहरी के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहक इम्तियाज अंसारी का खाता अचानक फ्रीज कर दिया गया ।
बैंक ने तर्क दिया कि गुजरात साइबर सेल के अनुसार, ‘देविक’ नाम के व्यक्ति ने गलती से इम्तियाज के खाते में ₹12,000 और ₹2,000 डाल दिए थे । लेकिन जब इम्तियाज ने अपना बैंक स्टेटमेंट निकाला, तो होश उड़ाने वाला सच सामने आया—उन तारीखों पर उनके खाते में ऐसी कोई रकम क्रेडिट ही नहीं हुई थी ।
इसे हम ‘भूतिया ट्रांजेक्शन’ (Ghost Transaction) कहते हैं। बिना सबूत देखे, बिना जाँच किए, एक अदृश्य रकम के नाम पर खाता फ्रीज कर दिया गया। यह ‘जन आक्रोश’ के पास आया पहला मामला था, जिसने हमें इस गहरे षड्यंत्र की तह तक जाने पर मजबूर किया।
2. वसूली का ‘नेटवर्क’ और मीडिया के खुलासे
मामला सिर्फ गलती का नहीं, बल्कि नीयत का भी लगता है। पीड़ित रोहित जुनेजा ने अपने आवेदन में एक बहुत गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने इंडिया टुडे (India Today) की 27 जनवरी 2024 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें खुलासा किया गया था कि “गुजरात साइबर पुलिस के कुछ अधिकारी बैंक खातों को फ्रीज करके लोगों से जबरन वसूली (Extortion) करने की कोशिश कर रहे थे” ।
मोडस ऑपरेंडी (तरीका) बेहद शातिर है:
- किसी के खाते में ₹500-₹700 जैसी मामूली रकम डालो या उसका दावा करो।
- पूरे बैंक खाते को (जिसमें लाखों रुपये हो सकते हैं) फ्रीज करवा दो।
- परेशान होकर ग्राहक पुलिस या दलालों से संपर्क करे और अनफ्रीज कराने के लिए रिश्वत दे।
3. ‘जन आक्रोश’ की कानूनी ढाल और रोहित की जीत
जब सिस्टम बिका हुआ लगे, तब कानून ही सहारा बनता है। ‘जन आक्रोश’ की टीम ने इन पीड़ितों को वह कानूनी कवच प्रदान किया, जिससे बैंक और पुलिस बैकफुट पर आ गए।
कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) के ग्राहक रोहित जुनेजा का खाता मात्र ₹700 के विवाद के कारण फ्रीज था । उनके खाते में लगभग ₹2.5 लाख फंसे थे । जन आक्रोश के मार्गदर्शन में लड़ी गई लड़ाई रंग लाई। सबूतों ने दिखाया कि पुलिस ने 18 दिसंबर 2024 को ही खाता अनफ्रीज करने का मेल भेज दिया था, जिसे बैंक दबाए बैठा था । अंततः, दबाव काम आया और रोहित का खाता अब सफलतापूर्वक बहाल (Unfreeze) कर दिया गया है।
4. न्यायालयों के फैसले: “पूरा खाता फ्रीज करना अवैध है”
जन आक्रोश ने पीड़ितों के आवेदनों में देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के ऐतिहासिक फैसलों को नजीर के तौर पर पेश किया:
- दिल्ली उच्च न्यायालय (जस्टिस मनोज जैन): कोर्ट ने पुलिस और बैंकों के इस रवैये को “ब्लैंकेट मेजर” (Blanket Measure) बताते हुए फटकार लगाई है। कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि केवल विवादित राशि पर रोक (Lien) लगाई जा सकती है, पूरे खाते पर नहीं ।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय: साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक को सिर्फ विवादित रकम को होल्ड करना चाहिए, न कि ग्राहक के पूरे ऑपरेशनल अकाउंट को ठप करना चाहिए ।
5. आज का शंखनाद: ₹500 और ₹3000 के लिए नई जंग
रोहित की जीत से मिली हिम्मत के बाद, आज 14 फरवरी 2026 को दो और पीड़ितों ने जन आक्रोश के माध्यम से हुंकार भरी है:
- आरा के आलोक कुमार (HDFC बैंक): इनके खाते पर चेन्नई और दिल्ली पुलिस की शिकायतों के कारण रोक है। विवादित राशि कुल मिलाकर मात्र ₹3,000 है । इन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 (आजीविका का अधिकार) के तहत बैंक को चुनौती दी है।
- डेहरी के उपेंद्र साह (बैंक ऑफ बड़ौदा): इनका मामला और भी हास्यास्पद है। विवादित राशि सिर्फ ₹500 है और बैंक ने उनके ₹50000 से ऊपर की राशि को ब्लॉक कर दिया है। बैंक कर्मचारियों ने न केवल मदद से इनकार किया, बल्कि पुलिस शिकायत का नंबर देने से भी मना कर दिया। आज इन्होंने भी जन आक्रोश के माध्यम से बैंक को कानूनी पाठ पढ़ा दिया है।
क्या आप भी इस डिजिटल तानाशाही के शिकार हैं?
यह लड़ाई सिर्फ इम्तियाज, रोहित, आलोक या उपेंद्र की नहीं है। यह आपकी और हमारी लड़ाई है। अगर आपके या आपके किसी परिचित के साथ भी ऐसा हुआ है—जहाँ छोटी सी रकम या बिना किसी वजह के बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है—तो चुप न रहें।
‘जन आक्रोश’ आपकी आवाज़ बनेगा और ‘जन आक्रोश’ आपको कानूनी रास्ता दिखाएगा।
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