डेहरी-ऑन-सोन | जन आक्रोश डेस्क
बिहार सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि रोहतास जिले में 49 नई औद्योगिक परियोजनाओं को हरी झंडी (Stage-1 Clearance) मिल चुकी है। यह पूरे जिले के लिए खुशी की बात है, लेकिन ‘जन आक्रोश’ का मानना है कि आंकड़ों की खुशी से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि ये उद्योग धरातल पर “कहाँ” उतरेंगे?

स्वाभाविक है कि सभी 49 उद्योग एक ही जगह नहीं लग सकते, लेकिन हमारा और डेहरी की जनता का तर्क साफ है— औद्योगिक पुनरुद्धार का केंद्र (Epicenter) तो डेहरी-डालमियानगर ही होना चाहिए।
विधायक का सवाल ‘डालमियानगर’ पर था, जवाब ‘जिले’ का आया
30 जनवरी को ‘जन आक्रोश’ ने अपनी रिपोर्ट में डेहरी को फूड प्रोसेसिंग हब बनाने की वकालत की थी। इसी तर्ज पर स्थानीय विधायक श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने सदन में बहुत ही सधे हुए अंदाज में प्रश्न पूछा।
उन्होंने सरकार से “रोहतास” का नहीं, बल्कि विशेष रूप से “डालमियानगर” का रोडमैप मांगा था। सरकार ने जवाब में पूरे जिले का आंकड़ा (49 यूनिट्स) दिया। यहीं पर हमारी और विधायक जी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है— यह सुनिश्चित करना कि इन 49 में से ‘शेर का हिस्सा’ (Lion’s Share) डेहरी और इसके आसपास के इलाकों को मिले।
डेहरी की दावेदारी सबसे मजबूत क्यों?
रोहतास जिला बड़ा है, लेकिन उद्योग वहीं पनपते हैं जहां इंफ्रास्ट्रक्चर हो। इस मामले में डेहरी-डालमियानगर और प्रस्तावित डेहरी जिले के कुछ ब्लॉक सबसे आगे हैं:
- जमीन और विरासत: डालमियानगर के पास पहले से ही औद्योगिक भूमि और एक बना-बनाया इकोसिस्टम है, जो जिले के किसी और हिस्से में नहीं।
- कनेक्टिविटी: NH-19 (जीटी रोड), डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और सोन नदी— यह ट्राइफेक्टा (Trifecta) केवल डेहरी के पास है।
- कच्चा माल: प्रस्तावित डेहरी जिले के ब्लॉक— नासरीगंज और काराकाट— धान और सब्जी उत्पादन में अग्रणी हैं, जो फूड प्रोसेसिंग के लिए जरूरी है। वहीं नौहट्टा और तिलौथू वन और खनिज संपदा से भरपूर हैं।
इसलिए, 49 में से यदि बड़ी और महत्वपूर्ण यूनिट्स डेहरी बेल्ट में नहीं लगतीं, तो यह संसाधनों का सही उपयोग नहीं होगा।

विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह: “कोशिश जारी है, उद्योग लगेगा”
इस पूरे परिदृश्य पर जब हमने विधायक श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह से बात की, तो वे भी इस बात से वाकिफ दिखे कि सिर्फ मंजूरी मिलना काफी नहीं, लोकेशन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा:
“सरकार कोशिश कर रही है, उद्योग लगेगा। हमारी पूरी कोशिश है कि डालमियानगर की पुरानी पहचान लौटे और यहाँ के इंफ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल हो।”
निष्कर्ष: हक की लड़ाई
सरकार ने गेंद रोहतास के पाले में डाल दी है। अब यह स्थानीय नेतृत्व और हम सब की जिम्मेदारी है कि हम इन 49 उद्योगों को बिखराव से बचाएं और उन्हें एक क्लस्टर के रूप में डेहरी-डालमियानगर क्षेत्र में स्थापित करवाएं।
क्योंकि अगर बिहार का मैनचेस्टर फिर से कहीं सांस ले सकता है, तो वह केवल डेहरी में ही संभव है।
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