डेहरी बनेगा फिर ‘मैनचेस्टर’? अभिषेक सांकृत ने सीएम नीतीश को सौंपा ‘विजन डॉक्यूमेंट’

डेहरी-ऑन-सोन | जन आक्रोश डेस्क

बिहार के औद्योगिक मानचित्र पर कभी “पूर्व का मैनचेस्टर” कहा जाने वाला डेहरी-ऑन-सोन आज अपनी पहचान ढूंढ रहा है। दशकों की उपेक्षा और राजनीतिक उदासीनता के बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक सदस्य और युवा उद्यमी अभिषेक सांकृत ने क्षेत्र के पुनरुत्थान के लिए एक बड़ा बीड़ा उठाया है।


अभिषेक सांकृत ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को दो अलग-अलग विस्तृत प्रस्ताव (ईमेल के माध्यम से) भेजकर डेहरी के विकास का एक नया रोडमैप पेश किया है। उनके ये प्रस्ताव केवल मांगें नहीं हैं, बल्कि एक सुविचारित ‘विजन डॉक्यूमेंट’ हैं, जो रोहतास और पूरे दक्षिण बिहार की तकदीर बदलने की क्षमता रखते हैं।

प्रस्ताव 1: वीर कुंवर सिंह अंतर्राष्ट्रीय कार्गो हवाई अड्डा – औद्योगिक क्रांति की ओर कदम: अपने पहले प्रस्ताव में, अभिषेक सांकृत ने डेहरी स्थित ‘सुअरा एयरस्ट्रिप’ को विकसित कर उसे “वीर कुंवर सिंह अंतर्राष्ट्रीय कार्गो हवाई अड्डा” के रूप में स्थापित करने की मांग की है।

अभिषेक ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर खींचा है कि डेहरी-ऑन-सोन की भौगोलिक स्थिति अद्वितीय है। यह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई औद्योगिक शहरों से महज 250 किलोमीटर की परिधि में है। यदि इस कार्गो एयरपोर्ट को ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से जोड़ दिया जाए, तो यह मध्य और पूर्वी भारत के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

अभिषेक का कहना है, “जिस डेहरी में कभी चीनी, सीमेंट और कागज के बड़े उद्योग थे, आज वहां सन्नाटा है। एक कार्गो एयरपोर्ट न केवल नए उद्योगों का आगमन सुनिश्चित करेगा, बल्कि दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा करेगा।”


प्रस्ताव 2: सम्राट अशोक की 200 मीटर ऊंची प्रतिमा – पर्यटन के जरिए रोजगार: अपने दूसरे पत्र में, उन्होंने एक भावुक अपील करते हुए सोन नदी के तट पर सम्राट अशोक की 200 मीटर ऊंची प्रतिमा और अखंड भारत संग्रहालय के निर्माण का प्रस्ताव रखा है।

अभिषेक सांकृत का विजन स्पष्ट है—अगर गुजरात ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के जरिए पूरी दुनिया को आकर्षित कर सकता है, तो बिहार अपने गौरवशाली इतिहास के जरिए क्यों नहीं? उन्होंने इसे “360 डिग्री प्रभाव” वाली परियोजना बताया है।

पत्र में उन्होंने लिखा है, “इतिहास केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने के लिए भी होता है। यह परियोजना बिहार के माथे पर लगे पिछड़ेपन के दाग को धो सकती है और हमारे युवाओं को अपने ही घर में सम्मानजनक रोजगार दे सकती है।”

क्षेत्र के प्रति समर्पित एक विजनरी सोच: जन सुराज पार्टी के संस्थापक सदस्य होने के नाते, अभिषेक सांकृत हमेशा से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की वकालत करते रहे हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पर्यटन प्रबंधन अध्ययन बोर्ड के सदस्य और एक सफल उद्यमी के रूप में, उनके ये सुझाव हवा-हवाई नहीं, बल्कि ठोस शोध और तकनीकी समझ पर आधारित हैं।

जहां आज की राजनीति अक्सर जाति और धर्म के इर्द-गिर्द सिमट जाती है, वहीं अभिषेक सांकृत ने ‘विकास और रोजगार’ को केंद्र में रखकर एक नई लकीर खींची है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि अगर नीयत साफ हो और विजन बड़ा हो, तो एक नागरिक भी सरकार को सोचने पर मजबूर कर सकता है।
अब देखना यह है कि क्या बिहार सरकार इस युवा सोच को अपनाकर डेहरी-ऑन-सोन को उसका खोया हुआ गौरव लौटा पाती है?

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