डेहरी-ऑन-सोन | जन आक्रोश ब्यूरो
बिहार के एक प्रमुख शहर और NH 19 (पहले: NH 2) के महत्वपूर्ण केंद्र, डेहरी-ऑन-सोन की लाखों की आबादी की जान की कीमत सरकार की नजर में क्या है? इसका जवाब 20 फरवरी 2026 को बिहार विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए उन लिखित उत्तरों में मिल गया है, जिसने सुशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जीटी रोड पर बसे इस शहर को स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ कागजी आश्वासन और एक क्रूर मजाक मिला है।

विधायक श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्नों पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय द्वारा 20 फरवरी को पटल पर रखे गए जवाब डेहरी की जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए काफी हैं।
5 महीने से ‘लापता’ है सरकार का नियुक्त डॉक्टर: सबसे हैरान करने वाला खुलासा डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (बेहोशी के डॉक्टर) की अनुपलब्धता को लेकर हुआ है। 20 फरवरी को सरकार ने विधानसभा में लिखित रूप से स्वीकार किया है कि डेहरी अस्पताल के लिए 3 अक्टूबर 2025 को ही विभागीय अधिसूचना के जरिए एक विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी की नियुक्ति-सह-पदस्थापन किया गया था।
विडंबना देखिए कि आज फरवरी 2026 खत्म होने को है, इस नियुक्ति को लगभग पाँच महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार का यह ‘कागजी डॉक्टर’ अब तक अस्पताल नहीं पहुँचा है। सरकार का खुद का कबूलनामा है कि उक्त चिकित्सक द्वारा अब तक योगदान नहीं किया गया है। सवाल यह है कि पांच महीने से डॉक्टर ड्यूटी से गायब है और विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है? आज भी मरीज बिना विशेषज्ञ के इलाज को मजबूर हैं।

हादसा हो तो 22 किलोमीटर दूर जाने का ‘क्रूर आदेश’: डेहरी और इसके आसपास NH 19 (पहले: NH 2) पर आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई जानें जाती हैं। जब विधायक ने पूछा कि क्या सरकार 50-60 किमी के दायरे में कोई उन्नत ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण डेहरी में नया सेंटर खोलने पर विचार कर रही है, तो जवाब बेहद निराशाजनक मिला।
सरकार ने 20 फरवरी को दिए गए अपने जवाब में साफ कर दिया है कि डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है।
सरकार का तर्क है कि डेहरी अस्पताल में प्राथमिक उपचार (ओपीडी, एक्स-रे, ईसीजी, पैथोलॉजी) की सुविधा तो है ही। इसके साथ ही, एक अजीबोगरीब फरमान सुनाया गया कि यहां से लगभग 22 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल, रोहतास (सासाराम) में ट्रॉमा सेंटर संचालित है, जहां दुर्घटना के मरीजों का इलाज होता है।
आज का सवाल: ‘गोल्डन आवर’ में 22 किमी का सफर कैसे तय होगा? चिकित्सा विज्ञान में दुर्घटना के बाद का पहला घंटा (गोल्डन आवर) जान बचाने के लिए सबसे अहम होता है। आज डेहरी की जनता सरकार से पूछ रही है कि NH 19 पर हुए किसी हादसे में खून से लथपथ मरीज को लेकर ट्रैफिक के बीच 22 किलोमीटर दूर जाने में जो समय बर्बाद होगा, उसमें अगर किसी की जान चली गई तो जिम्मेदार कौन होगा?
डेहरी जैसे महत्वपूर्ण शहर के साथ हर मामले में सौतेला व्यवहार यह साबित करता है कि पटना के वातानुकूलित कमरों में बैठे जिम्मेदारों को जमीनी हकीकत और आम आदमी की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।
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