डेहरी/पटना | जन आक्रोश एक्सक्लूसिव

बिहार विधानसभा के आगामी सत्र में रोहतास जिले के डेहरी की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर महिला शिक्षा की बदहाली का मुद्दा जोर-शोर से गूंजने वाला है। Janaakrosh.com के हाथ लगे एक एक्सक्लूसिव दस्तावेज (विधानसभा प्रश्नोत्तरी) से यह खुलासा हुआ है कि सरकार ने खुद माना है कि डेहरी स्थित महिला महाविद्यालय में विज्ञान और वाणिज्य जैसे प्रमुख विषयों की पढ़ाई नहीं होती है, और वहां परीक्षा भवन का अता-पता तक नहीं है।
यह मामला 212-डेहरी विधानसभा के विधायक श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह द्वारा उठाया गया है, जिसका जवाब उच्च शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार 10 फरवरी 2026 को सदन में देंगे।
प्रश्न संख्या 562 के तहत पूछे गए इस सवाल ने प्रशासनिक और विश्वविद्यालय स्तर पर चल रही लापरवाही की पोल खोल दी है।
क्या है पूरा मामला? (दस्तावेज का विस्तृत विश्लेषण)
डेहरी विधायक ने सरकार से तीन तीखे सवाल पूछे थे, जिसके जवाब में उच्च शिक्षा विभाग ने जो तथ्य पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
1. विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई पर सरकार की स्वीकारोक्ति: विधायक ने सीधा सवाल किया है कि क्या यह सच है कि डेहरी स्थित महिला महाविद्यालय में अभी तक विज्ञान (Science) और वाणिज्य (Commerce) संकाय का अध्यापन कार्य शुरू नहीं हुआ है?
- सरकार का जवाब: “उत्तर स्वीकारात्मक है।”
- विश्लेषण: सरकार ने बिना किसी लाग-लपेट के माना है कि शहर के एकमात्र प्रतिष्ठित महिला कॉलेज में छात्राएं आज भी केवल कला (Arts) विषयों तक सीमित हैं। विज्ञान और कॉमर्स पढ़ने के लिए बेटियों को शहर से बाहर जाना पड़ता है या निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है।
2. परीक्षा भवन: जर्जर नहीं, है ही नहीं!: विधायक ने पूछा था कि क्या कॉलेज का परीक्षा भवन जर्जर हो चुका है?
- सरकार का जवाब: सरकार ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए और भी कड़वा सच बयां किया। जवाब में कहा गया है- “महाविद्यालय में कोई परीक्षा भवन निर्मित नहीं है।”
- विश्लेषण: यानी विधायक जिसे जर्जर समझ रहे थे, वह असल में अस्तित्व में ही नहीं है। यह कॉलेज के इंफ्रास्ट्रक्चर की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।

3. कब सुधरेगी व्यवस्था? सरकार ने झाड़ा पल्ला: जब विधायक ने पूछा कि सरकार कब तक नए पाठ्यक्रम शुरू करेगी और 500 सीट की क्षमता वाला परीक्षा भवन बनाएगी, तो विभाग ने तकनीकी पेंच फंसाकर गेंद विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के पाले में डाल दी।
- पाठ्यक्रम पर: सरकार का कहना है कि नए पाठ्यक्रम शुरू करने का अधिकार विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत संबंधित विश्वविद्यालय का है। राज्य सरकार सिर्फ पदों का सृजन करती है।
- भवन निर्माण पर: सरकार ने बताया कि विभागीय आदेश संख्या 3802 (दिनांक 17.08.2024) के तहत कॉलेजों में निर्माण कार्य के लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक समिति गठित है।
- चौंकाने वाला खुलासा: जवाब में स्पष्ट लिखा है- “प्रश्नधीन महाविद्यालय में परीक्षा भवन निर्माण हेतु उक्त समिति (DM की अध्यक्षता वाली) से कोई प्रस्ताव राज्य सरकार को अनुशंसा सहित प्राप्त नहीं है।”
बड़ा सवाल: फाइल कहां अटकी है?
इस प्रश्नोत्तरी से यह स्पष्ट हो गया है कि डेहरी महिला कॉलेज की उपेक्षा के लिए सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई स्तरों पर लापरवाही हो रही है:
- विश्वविद्यालय प्रशासन: आखिर इतने वर्षों में विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई शुरू करने की पहल विश्वविद्यालय ने क्यों नहीं की?
- स्थानीय प्रशासन (DM कमिटी): जब सरकार ने निर्माण कार्यों के लिए जिला अधिकारी की अध्यक्षता में कमिटी बना दी है, तो अब तक परीक्षा भवन का प्रस्ताव बनाकर सरकार को क्यों नहीं भेजा गया?
- सरकार की भूमिका: क्या सरकार प्रस्ताव न आने का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बच सकती है?
निष्कर्ष
10 फरवरी 2026 को जब विधायक राजीव रंजन सिंह यह मुद्दा उठाएंगे, तो सरकार के पास जवाब तो ‘हाँ’ में होगा, लेकिन समाधान ‘प्रक्रिया’ में उलझा हुआ दिखेगा।
Janaakrosh.com द्वारा उजागर किए गए इस दस्तावेज ने यह साफ कर दिया है कि डेहरी की छात्राओं को अभी सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि प्रस्ताव अभी फाइलों से बाहर निकला ही नहीं है।
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