एक पुरानी मशहूर कहावत है—”चिराग तले अंधेरा”। अगर किसी को इसका जीता-जागता उदाहरण देखना हो, तो डेहरी-ऑन-सोन के बारह पत्थर मोहल्ले में आ जाइए। यह मोहल्ला डेहरी का सबसे बड़ा, सबसे अधिक आबादी वाला और सबसे व्यस्त इलाका माना जाता है, लेकिन यहां की साफ-सफाई, रख-रखाव और बुनियादी सुविधाओं की हालत देखकर यकीन नहीं होगा कि आप किसी शहर के मोहल्ले में हैं। ऐसा लगेगा मानो किसी अनदेखे स्लम एरिया में पहुंच गए हों।

चारों तरफ गंदगी और कचरे के ढेर नजर आते हैं। टूटे-फूटे नालों के स्लैब जिस कारण नालों में कचरा जमा हो रहा है, और ज़रा सी बारिश में कीचड़ में तब्दील हो जाने वाली मुख्य सड़क। गलियों में बदबू फैली रहती है, और गलियों में स्ट्रीट लाइटें नाम की भी नहीं। स्थानीय लोगों से बात करने पर पता चला कि यहां सफाई का कोई इंतजाम नहीं है—न रोड साफ होती है, न कचरा नियमित उठाया जाता है। जामा मस्जिद के ठीक सामने नाले की स्लैब कई महीनों से टूटी हुई है, लेकिन किसी का ध्यान नहीं जाता। स्थानीय युवकों का खुद सफाई करने का भी वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
यहां की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद की मुख्य पार्षद शशि कुमारी और उप-मुख्य पार्षद
रानी कुमारी इसी बारह पत्थर मोहल्ले की निवासी हैं। और यही कारण है कि हमने इस ख़बर की शुरूआत इस मशहूर कहावत यानि “चिराग तले अंधेरा” से की है। स्थानीय लोग बताते हैं कि उनकी (मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद और उनके प्रतिनिधि) गाड़ियां दिन में कई बार इसी रास्ते से गुजरती हैं, लेकिन इन जनप्रतिनिधियों का नजर इस इलाके की बदहाली पर नहीं पड़ता। जब नगर परिषद के सबसे बड़े पदाधिकारियों का अपना मोहल्ला ही साफ-सफाई, रोशनी और नालों जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है, तो शहर के बाकी इलाकों की क्या हालत होगी—यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है।
नगर परिषद का काम शहर की साफ-सफाई, नालियों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुविधाओं का प्रबंधन करना है, लेकिन लगता है विभाग “आराम” में इतना व्यस्त है कि काम करने का मौका ही नहीं मिल पाता।



अब देखना यह है कि इस खबर को पढ़कर नगर परिषद के पदाधिकारी जागते हैं या शहर को इसी गंदगी, बदबू और सुविधा-विहीन हालत में छोड़ देते हैं। मुख्य सड़क को बनवाते हैं या यूं ही लोग इस कीचड़ नुमा सड़क पर चलने को मजबूर रहेंगे।
अगर आपके मोहल्ले, गली या वार्ड में भी ऐसी ही कोई समस्या है—जैसे गंदगी, टूटी नालियां, जलभराव या रोशनी की कमी—तो कृपया हमें बताएं। नीचे दिए सोशल मीडिया लिंक्स पर मैसेज करें या connect@janaakrosh.com पर ईमेल भेजें। आपकी आवाज बदलाव ला सकती है!