कैमूर स्वास्थ्य: 13 प्रसव केंद्रों में सिर्फ 2 महिला डॉक्टर, भगवान भरोसे जच्चा-बच्चा!

प्रसव के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बदहाल। कैमूर के 11 प्रसव केंद्रों में महिला डॉक्टर नदारद, क्या डेहरी और रोहतास के अस्पतालों का भी यही है हाल?

जन आक्रोश डेस्क

सासाराम/कैमूर: बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षित संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) के बड़े-बड़े सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बेहद डराने वाली है। पड़ोसी जिले कैमूर से एक ऐसा सच सामने आया है, जो सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हाल ही में प्रमुख समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कैमूर जिले के 13 स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव (डिलीवरी) की सुविधा तो कागजों पर मौजूद है, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 जगह ही महिला डॉक्टर तैनात हैं। बाकी 11 स्वास्थ्य केंद्रों में कोई महिला विशेषज्ञ चिकित्सक (Gynecologist) ही नहीं है।

नर्सों के भरोसे चल रहा है पूरा सिस्टम
भास्कर की पड़ताल के मुताबिक, इन 11 केंद्रों पर सुरक्षित प्रसव कराने का पूरा जिम्मा नर्सों के भरोसे छोड़ दिया गया है। सामान्य प्रसव तो यहां हो जाते हैं, लेकिन जैसे ही किसी गर्भवती महिला की स्थिति बिगड़ती है या कोई मेडिकल जटिलता (Complication) आती है, तो बिना समय गंवाए उन्हें मोहनिया या भभुआ सदर अस्पताल के लिए ‘रेफर’ कर दिया जाता है। इस ‘रेफरल’ की प्रक्रिया में कई बार बहुमूल्य समय बर्बाद होता है और जच्चा-बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ जाती है।

प्रोत्साहन राशि का क्या फायदा, जब इलाज ही नहीं?
सरकार महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के लिए लगातार जागरूक कर रही है और इसके लिए बाकायदा प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में महिला डॉक्टर ही नहीं होंगी, तो सुरक्षित प्रसव की गारंटी कौन लेगा?

क्या डेहरी और रोहतास की स्वास्थ्य व्यवस्था भी ऐसी ही है?
कैमूर की इस बदहाल स्थिति के सामने आने के बाद अब रोहतास जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठना लाजमी है। जन आक्रोश स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से यह सवाल पूछता है कि:

  • क्या डेहरी और रोहतास के ग्रामीण इलाकों में मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में पर्याप्त महिला डॉक्टर मौजूद हैं?
  • क्या हमारे जिले की महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की पूरी सुविधा मिल रही है या वे भी महज ‘रेफरल सेंटर’ का दंश झेलने को मजबूर हैं?

कैमूर का यह मामला सिर्फ एक जिले की नाकामी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर एक तमाचा है। सरकार और स्वास्थ्य महकमे को जल्द से जल्द ग्रामीण प्रसव केंद्रों पर महिला चिकित्सकों की बहाली सुनिश्चित करनी चाहिए।

सरकारी अस्पताल की बदहाली का दंश यदि आपको भी झेलना पड़ा हो तो नीचे दिये Social Media Icon पर Click कर Comment करें।

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