डेहरी-ऑन-सोन: बालू खनन, परिवहन और व्यापार (GST) के जरिए अनुमान के मुताबिक पूरे रोहतास जिले का लगभग 40 से 50 प्रतिशत राजस्व अकेले उत्पन्न करने वाले डेहरी अनुमंडल को विकास के नाम पर सरकार से सिर्फ ‘अभाव’ और ‘चुप्पी’ मिल रही है। 18वीं बिहार विधानसभा के हालिया सत्र में स्थानीय विधायक श्री राजीव रंजन सिंह (उर्फ सोनू सिंह) द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार के लिखित जवाबों ने यह साबित कर दिया है कि डेहरी को सिर्फ “राजस्व उगाहने वाली मशीन” समझा जा रहा है। सबसे बड़ा मजाक शहर की सबसे व्यस्त सड़क के चौड़ीकरण को लेकर हुआ है, जिसे ‘प्राथमिकता’ और ‘फंड’ का बहाना बनाकर टाल दिया गया।

4.81 करोड़ की सड़क के लिए ‘संसाधन’ नहीं, जबकि आधा जिला चलाता है डेहरी
डेहरी बाजार का थाना चौक से पाली पुल (ROB) तक का 1.30 किलोमीटर का हिस्सा शहर का अति व्यस्त मार्ग है, जहां सड़क संकीर्ण होने के कारण रोजाना भीषण जाम लगता है। पथ निर्माण विभाग ने सदन में स्वीकार किया कि इस सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए 4,81,42,000 (चार करोड़ इक्यासी लाख बयालीस हजार) रुपये का प्राक्कलन (Estimate) प्राप्त हो चुका है ।
लेकिन काम कब शुरू होगा? इसके जवाब में सरकार ने साफ कह दिया कि “संसाधन की उपलब्धता एवं प्राथमिकता के अनुरूप” आगे की कार्रवाई की जाएगी। यहाँ सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि जो क्षेत्र बालू रॉयल्टी, भारी वाहनों के टैक्स और व्यावसायिक निबंधन के जरिए पूरे जिले के खजाने का 40-50% हिस्सा देता है, उस डेहरी के मुख्य बाजार की सड़क अगर सरकार की ‘प्राथमिकता’ सूची में नहीं है और इसके लिए मात्र 4.81 करोड़ के ‘संसाधन’ नहीं हैं, तो फिर अरबों का यह राजस्व जा कहाँ रहा है?
सिर्फ सड़क ही नहीं, हर मोर्चे पर डेहरी की जनता को मिला है ‘धोखा’
सड़क के अलावा डेहरी की अन्य बुनियादी और जायज मांगों पर गौर करें, तो सरकार की ओर से हर जगह पल्ला झाड़ने वाले उत्तर ही मिले हैं:
- ट्रामा सेंटर और स्वास्थ्य व्यवस्था: NH-19 (जीटी रोड) पर भीषण दुर्घटनाओं के बावजूद, डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में उन्नत ट्रामा सेंटर स्थापित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि घायलों का इलाज 22 किमी दूर सासाराम सदर अस्पताल में किया जाता है।
- मरीन ड्राइव का सपना टूटा: शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोन नदी के किनारे नासरीगंज से NH-19 होते हुए इन्द्रपुरी तक मरीन ड्राइव बनाने के प्रस्ताव को भी सरकार ने यह कहकर सिरे से नकार दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे: डेहरी महिला महाविद्यालय में विज्ञान व वाणिज्य की पढ़ाई और नए परीक्षा भवन के निर्माण पर सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि पाठ्यक्रम शुरू करना विश्वविद्यालय का काम है, राज्य सरकार सिर्फ पद सृजन करती है। अकोढ़ी गोला में नए महिला कॉलेज खोलने की कोई योजना नहीं है। वहीं, भालुआरी का उत्क्रमित हाई स्कूल मात्र 4 कमरों में चल रहा है, जिसके कारण बच्चों को मजबूरी में अलग-अलग शिफ्टों में पढ़ाने का आदेश दिया गया है।
- स्टेडियम निर्माण पर ‘ना’: नगर परिषद डेहरी में नगर भवन के पीछे इंडोर स्टेडियम बनाने की मांग पर सरकार ने ‘परती के रूप में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं’ होने का तर्क देकर इसे खारिज कर दिया।
- डालमियानगर में उद्योग: डालमियानगर में फूड प्रोसेसिंग या अन्य उद्योग लगाने के सवाल पर उद्योग विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि “राज्य सरकार के द्वारा स्वयं कोई औद्योगिक इकाई की स्थापना नहीं की जाती है,” और यह केवल निजी क्षेत्र के निवेशकों पर निर्भर है।
निष्कर्ष: पूर्ण जिला बनाने पर भी रहस्यमयी चुप्पी
रोहतास का आर्थिक इंजन (40-50% राजस्व दाता) होने के बावजूद, डेहरी को पूर्ण जिला बनाने की बहुप्रतीक्षित मांग पर भी पूरी तरह से चुप्पी साधी गई है। विधानसभा में मिले इन सभी आधिकारिक ‘ना’ ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय विधायक के लगातार सवाल उठाने के बावजूद फाइलों में डेहरी के विकास को लाल फीताशाही के मकड़जाल में उलझा दिया गया है। डेहरी की जनता अब इस उपेक्षा को भली-भांति समझ रही है, और यह आक्रोश अब सड़कों पर दिख सकता है।
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