डेहरी: बिहार की राजनीति में एक बार फिर जनता की आँखों में धूल झोंकने का खेल सामने आ गया है। महज कुछ महीने पहले, 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) के तमाम दिग्गज नेताओं ने गला फाड़-फाड़ कर बिहार की सड़कों और चुनावी मंचों से चिल्लाया था- “25 से 30, फिर से नीतीश।” लेकिन अब ‘सुशासन बाबू’ ने बीच मझधार में बिहार को छोड़कर दिल्ली (राज्यसभा) की सुरक्षित उड़ान भरने की तैयारी कर ली है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वह नारा सिर्फ वोट बटोरने का एक सस्ता राजनीतिक हथकंडा था?

सच साबित हुई प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में अगर कोई एक बात सबसे ज्यादा सच साबित हुई है, तो वह है जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) का चुनावी आकलन। जब पूरा एनडीए “नीतीश-नीतीश” कर रहा था, तब प्रशांत किशोर ने डंके की चोट पर कहा था:
“आप इसे लिखकर रख लीजिए, नवंबर के बाद बिहार में नया मुख्यमंत्री बन रहा है। नीतीश कुमार अब 25 से 30 तक की लंबी पारी खेलने वाले नेता नहीं रहे। वे सिर्फ अपनी राजनीतिक विदाई की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।”
आज नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला पीके की उसी बात पर मुहर लगा रहा है। जन सुराज पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने चुनाव के दौरान गाँव-गाँव जाकर जनता को यही सच्चाई बताने का प्रयास किया था कि एनडीए का यह चेहरा केवल एक छलावा है और चुनाव के बाद बिहार को एक अस्थिरता की ओर धकेल दिया जाएगा। आज वह चेतावनी शत-प्रतिशत सच साबित हो रही है।
सम्राट चौधरी के ‘मुंगेरीलाल वाले हसीन सपने’
इस ड्रामे में सबसे हास्यास्पद स्थिति बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सम्राट चौधरी की है। अप्रैल 2025 में जब जेडीयू ने “25 से 30 फिर से नीतीश” का पोस्टर लगाया था, तो सम्राट चौधरी ने सीना तानकर कहा था, “नीतीश कुमार के नेतृत्व पर कोई संशय नहीं है।” लेकिन आज सच्चाई क्या है? जैसे ही नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबर पक्की होने लगी, पटना के राजनीतिक गलियारों में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के ‘हसीन सपने’ तैरने लगे। जो कल तक नीतीश के नाम की कसमें खा रहे थे, आज वही उनकी विदाई की शहनाई बजने का सबसे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। क्या चुनाव में जनता से नीतीश के नाम पर वोट मांगकर, अब पिछले दरवाजे से खुद कुर्सी पर बैठने की यह कोई पूर्व-नियोजित स्क्रिप्ट थी?
सहयोगियों के बड़े-बड़े दावों की खुली पोल
पूरा एनडीए कुनबा आज बिहार की जनता के कटघरे में खड़ा है:
- उपेंद्र कुशवाहा: चुनाव नतीजों के वक्त पूरे आत्मविश्वास से कहा था, “नीतीश जी मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे।” आज कुशवाहा जी की वह गारंटी कहाँ गई?
- जीतन राम मांझी: चुनाव से पहले ‘बिना दूल्हे की बारात’ का राग अलापने वाले मांझी जी ने चुनाव के बाद नीतीश को अपना दूल्हा मान लिया था। क्या उन्हें नहीं पता था कि यह दूल्हा बीच रास्ते में ही भागने वाला है?
- चिराग पासवान: इन्होंने भी ताल ठोक कर कहा था कि “चुनाव परिणामों के बाद नीतीश कुमार ही फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।” आज चिराग की वह ‘निश्चितता’ धरी की धरी रह गई।
जनता के साथ सबसे बड़ा धोखा
बिहार की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। यह स्पष्ट हो गया है कि एनडीए नेताओं ने सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नीतीश कुमार के चेहरे का इस्तेमाल किया। वजह जो भी हो, धोखा सिर्फ बिहार के मतदाताओं के साथ हुआ है। अब जब नीतीश कुमार कुर्सी छोड़ रहे हैं, तो मुख्यमंत्री पद के लिए लालायित सम्राट चौधरी और अन्य दावेदारों के बीच जो ‘कुर्सी युद्ध’ छिड़ेगा, उसमें बिहार के विकास का क्या हाल होगा, यह देखना बाकी है। जन आक्रोश मीडिया इस राजनीतिक ड्रामे और धोखे पर बेबाक सवाल पूछता रहेगा!