डेहरी-ऑन-सोन (जन आक्रोश मीडिया डेस्क): वार्षिक परीक्षाओं का समय आते ही डेहरी सहित प्रदेश के कई निजी विद्यालयों में शिक्षा के नाम पर ‘वसूली’ का खेल शुरू हो गया है। बच्चों के भविष्य को ढाल बनाकर कई प्राइवेट स्कूल अभिभावकों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं। कहीं फरवरी माह में ही मार्च तक की एडवांस फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है, तो कहीं स्कूल के नाम वाले ब्रांडेड बैग और एक ही दुकान से कॉपी-किताबें खरीदने का ‘तुगलकी फरमान’ जारी किया जा रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि बकाया या एडवांस फीस न देने पर मासूम बच्चों को परीक्षा से वंचित करने (एडमिट कार्ड रोकने) की अवैध धमकियां दी जा रही हैं।
अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरे हुए हैं और इस मनमानी के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं। लेकिन कानून और शिक्षा विभाग के नियम कुछ और ही कहते हैं।
क्या हैं आपके अधिकार और स्कूलों की मनमानी की असलियत?
- एडमिट कार्ड रोकना पूरी तरह अवैध: ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (RTE Act) और माननीय उच्च न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश हैं कि फीस अभिभावक और प्रबंधन के बीच का मामला है। इसके लिए किसी भी बच्चे का एडमिट कार्ड रोकना, उसे परीक्षा हॉल से बाहर करना या प्रताड़ित करना गैर-कानूनी है।
- एडवांस फीस का दबाव: स्कूल नियमतः केवल मासिक आधार पर फीस ले सकते हैं। बिना महीना पूरा हुए अगले महीने की एडवांस फीस एकमुश्त जमा करने का दबाव बनाना ‘बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम’ का सीधा उल्लंघन है।
- कॉपी-किताबों का ‘सिंडिकेट’: शिक्षा बोर्ड (CBSE/State Board) के नियमों के तहत स्कूल एक शैक्षणिक संस्थान है, कोई दुकान नहीं। विद्यालय परिसर के भीतर किताबें, कॉपियां, ब्रांडेड बैग बेचना या किसी ‘चिन्हित दुकान’ से खरीदारी के लिए बाध्य करना ‘शिक्षा का व्यवसायीकरण’ है, जिस पर सख्त पाबंदी है।
अभिभावक क्या करें? कैसे करें इस मनमानी का सामना?
यदि आपके बच्चों का स्कूल भी ऐसा कोई अनुचित दबाव बना रहा है, तो डरें नहीं, बल्कि जागरूकता से काम लें। आप इन आसान कदमों से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं:मौखिक बहस न करें, लिखित प्रमाण मांगें: यदि स्कूल एडमिट कार्ड रोकने या विशेष दुकान से किताबें खरीदने को कहता है, तो उनसे यह बात स्कूल की डायरी में लिखकर देने, व्हाट्सएप या ईमेल पर आधिकारिक नोटिस भेजने को कहें। यह आपके लिए सबसे बड़ा ‘सबूत’ बनेगा।
- जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से शिकायत: इस सबूत के साथ आप सीधे रोहतास (या अपने संबंधित जिले) के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को एक लिखित शिकायत दे सकते हैं।
- जिलाधिकारी (DM) के पास अपील: हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ‘जिला स्तरीय शुल्क विनियामक समिति’ होती है। आप वहां भी स्कूल की इस अवैध वसूली और मोनोपॉली के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
‘जन आक्रोश मीडिया’ करेगा आपकी मदद, आप अकेले नहीं हैं:
हम समझते हैं कि कई बार अभिभावक अकेले स्कूल प्रबंधन से टकराने या कानूनी प्रक्रिया में उलझने से हिचकिचाते हैं। लेकिन अन्याय सहना भी अन्याय को बढ़ावा देना है। यदि डेहरी या आस-पास के किसी भी विद्यालय द्वारा आपके साथ ऐसी कोई मनमानी की जा रही है, तो ‘जन आक्रोश मीडिया’ पूरी मजबूती से आपके साथ खड़ा है। आपको अपनी पहचान उजागर करने की आवश्यकता नहीं है। आप स्कूल द्वारा भेजे गए किसी भी अवैध फरमान (व्हाट्सएप मैसेज, डायरी का पन्ना या स्कूल ब्रांडिंग वाले बैग/किताबों की रसीद) को हमें ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं। हमारी टीम न सिर्फ आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखेगी, बल्कि आपकी तरफ से संबंधित अधिकारियों (DEO/DM) तक इस मुद्दे को पहुँचाने और उचित ड्राफ्टिंग में आपकी निःशुल्क सहायता भी करेगी।
हमसे यहाँ संपर्क करें / सबूत भेजें: 📧 ईमेल: connect@janaakrosh.com
(नोट: कृपया ईमेल में अपना नाम, अपना मोबाइल नम्बर, स्कूल का नाम और पूरी समस्या विस्तार से लिखें। आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।)
आइए, शिक्षा के इस बाजारीकरण के खिलाफ आवाज़ उठाएं। जागरूक बनें और अपने बच्चों के अधिकारों के लिए आगे आएं।
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