डेहरी-ऑन-सोन: बिहार का ‘स्लीपर हिट’ शहर, जहां तरक्की की लहर दौड़ने को तैयार!

जन आक्रोश स्पेशल रिपोर्ट | मो० दिलशाद आलम

कल्पना कीजिए एक ऐसा शहर जहां पुरानी फैक्ट्रियों की राख से नई उम्मीदें फूट रही हों, जहां सोन नदी की लहरें पर्यटकों को पुकार रही हों, और जहां राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रकों की कतारें आर्थिक क्रांति की कहानी सुना रही हों। जी हां, हम बात कर रहे हैं रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन की, जो अब तरक्की का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। एक समय डालमियानगर की वजह से औद्योगिक हब रहा यह शहर अब लघु उद्योगों, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन की बदौलत फिर से जाग रहा है। लेकिन सवाल है: क्या सरकार और निवेशक इसकी क्षमता को पहचान पाएंगे? क्या अभी-अभी जो कल्पना हमने की वो साकार हो सकती हैं? आइए, जमीनी हकीकत पर नजर डालते हैं।


औद्योगिक पुनरुद्धार: पुरानी फैक्ट्रियों से नई शुरुआत
डेहरी का इतिहास डालमियानगर से जुड़ा है, जहां कभी सीमेंट, पेपर और शुगर, इत्यादि फैक्ट्रियों की धूम थी। लेकिन अब वो दौर बीत चुका है। शहर की असली ताकत अब लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) में छिपी है, जो कम पूंजी में बड़े सपने साकार कर सकते हैं। स्थानीय निवासी राजेश कुमार (काल्पनिक नाम) कहते हैं, “डालमियानगर की जमीन बेकार पड़ी है, लेकिन अगर यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगें, तो हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।”

खासतौर पर, रोहतास को ‘बिहार का धान का कटोरा’ कहा जाता है, तो यहां राइस मिलों से आगे बढ़कर राइस ब्रान ऑयल मिलें लगाना एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। चावल के भूसे से निकलने वाला तेल न सिर्फ स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि बाजार में इसकी मांग आसमान छू रही है। इसी तरह, टमाटर और सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट्स से कैचअप, डिब्बाबंद सब्जियां और अन्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। कैमूर और रोहतास और आस-पास के अन्य जिलों के किसान अपनी उपज को सीधे फैक्ट्री तक पहुंचाकर बेहतर दाम पा सकते हैं। सरकार अगर MSME क्लस्टर विकसित करे, तो यह क्षेत्र पूर्वी भारत का फूड प्रोसेसिंग हब बन सकता है – और हां, यह सब कम निवेश में संभव है!

लॉजिस्टिक्स हब: कनेक्टिविटी का जादू
डेहरी की सबसे बड़ी USP है इसकी लोकेशन। जीटी रोड (NH-19) पर स्थित यह शहर हावड़ा-नई दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड रेलवे लाइन से जुड़ा है, जो उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार को आपस में बांधता है। यहां ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने से भारी वाहनों की पार्किंग और मेंटेनेंस की समस्या हल हो सकती है, और यह पूर्वी भारत का प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र बन सकता है।

ई-कॉमर्स की दुनिया में फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी कंपनियां अब टियर-2 और 3 शहरों में वेयरहाउस तलाश रही हैं। डेहरी की NH-19 कनेक्टिविटी इसे डिस्ट्रीब्यूशन हब बनाने के लिए परफेक्ट बनाती है। अगर आपके पास जमीन है, तो वेयरहाउस बनाकर किराए पर देना एक सुरक्षित बिजनेस मॉडल है – कम जोखिम, ज्यादा मुनाफा! विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट मिलेगा।

पर्यटन का गेटवे: रोहतास की सुंदरता को जगाना
डेहरी को ‘गेटवे ऑफ रोहतास’ के रूप में ब्रांड करना कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है। रोहतासगढ़ किला, माझर कुंड, धुआं कुंड और कैमूर की पहाड़ियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, लेकिन कमी है सुविधाओं की। पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन रुकते नहीं – सासाराम या वाराणसी चले जाते हैं।

इसे बदलने के लिए, डेहरी को पर्यटन का ‘बेस कैंप’ बनाया जा सकता है। सोन नदी के किनारे को पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर रिवरफ्रंट विकसित करना होगा, जहां कैफे, बोटिंग और शाम की सैर का मजा लिया जा सके। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अच्छे होटल, बजट रेस्टोरेंट और ‘ढाबा कल्चर’ विकसित करना होगा। स्थानीय युवाओं को टूर गाइड ट्रेनिंग देकर, और पैकेज तैयार करके डेहरी स्टेशन से तुतला भवानी, रोहतासगढ़ किला और इंद्रपुरी बराज तक का पूरा टूर – गाड़ी, खाना और गाइड सब शामिल किया जा सकता है।

शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और रियल एस्टेट: अतिरिक्त बूस्टर्स
डेहरी में उच्च तकनीकी शिक्षा की कमी है, लेकिन वोकेशनल सेंटर्स स्थापित करने से युवा स्थानीय उद्योगों के लिए तैयार हो सकते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा में सोन नहर पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाकर बिजली की समस्या हल की जा सकती है। और रियल एस्टेट? आसपास के गांवों और शहरों से लोग अच्छे स्कूल और सुविधाओं के लिए डेहरी में बसना चाहते हैं – सुनियोजित टाउनशिप्स यहां बड़ा बाजार हैं।

निष्कर्ष: समय है जागने का!
डेहरी-ऑन-सोन के पास सड़क, रेल और सोन नदी – तीनों संसाधन हैं। अगर डालमियानगर की जमीन का सही उपयोग हो और निवेशकों का ध्यान आकर्षित हो तो यह न सिर्फ रोहतास का, बल्कि पूरे बिहार का आर्थिक इंजन बन सकता है। लेकिन इसके लिए स्थानीय प्रशासन, सरकार और निजी सेक्टर को हाथ मिलाना होगा। क्या डेहरी अपनी किस्मत खुद लिखेगा? समय बताएगा, लेकिन संभावनाएं अपार हैं। अगर आप निवेशक हैं या स्थानीय हैं, तो अब एक्शन का वक्त है!

जन आक्रोश आपके सुझावों का स्वागत करता है। क्या आपको लगता है डेहरी में और क्या संभावनाएं हैं? हमें कमेंट में बताएं। इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों से साझा करें और अपनी चर्चाओं में इन मुद्दों को शामिल करें। हमें नीचे दिए सोशल मीडिया लिंक्स के माध्यम से फॉलो करें।

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