डिजिटल इंडिया में आज भी खून के लिए दूसरे शहर में क्यों बेबस है आम आदमी? जन आक्रोश मीडिया ने पीएम मोदी को भेजा ‘राष्ट्रीय डिजिटल ब्लड स्वैप’ का फुल-प्रूफ प्लान।
डेहरी ऑन सोन | विशेष रिपोर्ट
कल्पना कीजिए कि आपका कोई अपना अस्पताल के बिस्तर पर है, डॉक्टर ने तुरंत ब्लड लाने को कहा है। आपके मित्र और रिश्तेदार दूसरे शहर में रक्तदान करने को तैयार हैं, लेकिन हमारा सिस्टम कहता है कि “वहाँ का खून यहाँ नहीं चलेगा।” यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य तंत्र की वह कड़वी हकीकत है, जिसका सामना हर दिन हजारों भारतीय करते हैं।

हाल ही में ‘जन आक्रोश मीडिया’ के संपादक मो. दिलशाद आलम को अपने एक महिला रिश्तेदार के इलाज के दौरान पटना एम्स (AIIMS) में इसी बेबसी से गुजरना पड़ा। एम्स प्रशासन को ब्लड की जरूरत थी। संपादक के मित्र और रिश्तेदार डेहरी, बनारस (वाराणसी), इत्यादि नगरों में मौजूद थे और तत्काल रक्त की आवश्यकता को देखते हुए वे वहीं रक्तदान कर पटना में ब्लड उपलब्ध कराना चाहते थे।
लेकिन एम्स प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि डोनर को स्वयं पटना आकर उनके ही ब्लड बैंक में फिजिकली रक्तदान करना होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि दूसरे शहर से ‘ब्लड स्वैप’ (Blood Swap) करने की कोई व्यवस्था उनके पास नहीं है। यहां तक कि उन्होंने बाहर के किसी अन्य ब्लड बैंक (जैसे रेड क्रॉस, PMCH आदि) से भी लाया गया ब्लड स्वीकार करने से साफ मना कर दिया, जिसके पीछे संभवतः अस्पताल की कोई अपनी स्टैंडर्ड मेडिकल प्रक्रिया या तकनीकी मानक रहे होंगे।
सिस्टम की यह खामी केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। ‘जन आक्रोश मीडिया’ ने जब इस दिशा में अपनी रिसर्च की, तो एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। हमारी पड़ताल में यह बात निकलकर आई कि ‘इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी’ जैसी देश की सबसे बड़ी और प्रमुख संस्थाओं के पास भी ऐसी कोई ‘राष्ट्रीय स्वैप नीति’ या सेवा उपलब्ध नहीं है, जिससे डेहरी या बनारस में दिए गए रक्त के बदले पटना में ब्लड प्राप्त किया जा सके।
अब आंसुओं की जगह आएगी ‘मुस्कान’ (M.U.S.K.A.N)
इस दर्दनाक सिस्टम को बदलने के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक विस्तृत जीवन-रक्षक प्रस्ताव भेजा गया है। इस अभियान को नाम दिया गया है— M.U.S.K.A.N (मुस्कान)।
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यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अस्पताल के बाहर रोते परिजनों के चेहरे पर राहत लाने वाला एक तकनीकी हथियार है। M.U.S.K.A.N का अर्थ है: Medical Unified Swap Kosh & Access Network (मेडिकल यूनिफाइड स्वैप कोष एंड एक्सेस नेटवर्क)।
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क्या है M.U.S.K.A.N नीति के 4 बड़े पिलर?
प्रधानमंत्री मोदी को भेजे गए “वन नेशन, वन ब्लड ग्रिड” के इस ड्राफ्ट में सरकार से निम्नलिखित डिजिटल नीतियां तुरंत लागू करने की मांग की गई है:
- डिजिटल ब्लड वॉलेट (OTP सिस्टम): UPI की तर्ज पर एक डिजिटल नेटवर्क बने। यदि कोई व्यक्ति डेहरी में रक्तदान करे, तो उसके खाते में यूनिट क्रेडिट हो जाए और 1 माह की वैधता वाला ‘वन-टाइम यूनिक नंबर’ (OTP) जनरेट हो। डोनर यह नंबर देश में कहीं भी मौजूद अपने मरीज को दे, और वह तुरंत ब्लड प्राप्त कर ले।
- स्वैच्छिक डोनर्स के लिए 1 साल का ‘जीवन बीमा’: लोग भविष्य के डर से रक्तदान से कतराते हैं। यदि कोई स्वेच्छा से रक्तदान करे, तो वे यूनिट्स उसके डिजिटल खाते में 1 साल तक सुरक्षित रहें। आपात स्थिति में वह डोनर देश के किसी भी शहर में खुद या अपने परिजन के लिए तुरंत ब्लड क्लेम कर सके।
- कालाबाजारी पर सर्जिकल स्ट्राइक: इस डिजिटल प्रणाली को ‘आधार कार्ड/पैन कार्ड’ से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। इससे माफिया झूठी जानकारी देकर खून बेचने का धंधा नहीं कर पाएंगे।
- राष्ट्रीय मानकीकरण: देश के सभी ब्लड बैंकों में एक समान और आधुनिक टेस्टिंग तकनीक अनिवार्य की जाए ताकि कोई भी बड़ा अस्पताल बाहर का ब्लड लेने से मना न करे।
PMO तक पहुँचा मामला
इस विस्तृत प्रस्ताव को PMO के ग्रीवांस पोर्टल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया गया है। साथ ही, ब्लड स्वैप की इस कमी को उजागर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय में RTI भी दायर की गई है।
अब देखना यह है कि दुनिया भर में ‘डिजिटल इंडिया’ का डंका बजाने वाली हमारी सरकार, आम आदमी की रगों से जुड़ी इस बुनियादी जरूरत पर ‘मुस्कान’ (M.U.S.K.A.N) नेटवर्क को कब तक धरातल पर उतारती है।
एक जागरूक नागरिक होने के नाते, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था में इस बदलाव की मांग करें। यदि आप भी चाहते हैं कि रक्त की कमी के कारण किसी और परिवार को वह दर्द न झेलना पड़े जो हमने झेला, तो इस अभियान को अपना समर्थन दें। क्या आप भी कभी ब्लड के लिए अस्पताल के बाहर परेशान हुए हैं? अपनी आपबीती missionmuskan@janaakrosh.com पर ईमेल कर साझा करें और साथ ही सरकार से ‘मुस्कान’ (MUSKAN) नीति लागू करने की मांग करें।
