गुड्डू चंद्रवंशी फेल, बारह पत्थर के मुद्दे पर अब सोनू सिंह की अग्निपरीक्षा!

डेहरी ऑन सोन | जन आक्रोश मीडिया

डेहरी नगर परिषद क्षेत्र के बारह पत्थर (वार्ड नंबर 35, 36 और 37) के निवासियों के लिए मालगुजारी रसीद और स्थायी निवास प्रमाण पत्र का मुद्दा कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दशकों पुराना वो नासूर है जिसकी खबरों से पटे अखबारों पर लोगों ने पकौड़े खाए होंगे। पीढ़ियों से यहां रह रहे लोग आज भी अपने ही घर की ज़मीन के कागज़ात और सरकारी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। इसी दशकों पुरानी आग में एक बार फिर सियासत की नई आहुति पड़ी है।

आज, 16 सितंबर 2026 को, 212 डेहरी विधानसभा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर इस ज्वलंत मुद्दे पर एक पत्र सौंपा है। पत्र पर मंत्री द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए रोहतास समाहर्ता को विस्तृत जांच कर रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश भी लिखा गया है। तस्वीरों में विधायक और मंत्री की शिष्टाचार मुलाकात काफी सकारात्मक लग रही है, लेकिन डेहरी की जनता जानती है कि ‘फोटोबाजी’ और ‘ज्ञापन’ का यह खेल नया नहीं है।

इस नए घटनाक्रम ने उन पुराने जख्मों और नाकामियों को फिर से कुरेद दिया है, जिसका सीधा ठीकरा नगर परिषद की मुख्य पार्षद शशि कुमारी और परिषद के फैसलों में मजबूत सियासी दखल रखने वाले उनके प्रतिनिधि गुड्डू चंद्रवंशी की कार्यशैली पर फूटता है।

अखबारों की कतरनें गवाह हैं: गुड्डू चंद्रवंशी के नाम से सिर्फ सुर्खियां छपीं, रसीद नहीं
अगर हम इतिहास के पन्नों को थोड़ा पीछे पलटें, तो मार्च 2023 से लेकर जनवरी 2024 (सावित्रीबाई फुले जयंती) तक का दौर याद आता है। दैनिक भास्कर, जागरण, नवबिहार टाइम्स, बिहार दर्शन से लेकर तमाम स्थानीय अखबारों के पन्ने इन्हीं आश्वासनों से रंगे पड़े थे। उस समय मुख्य पार्षद शशि कुमारी के प्रतिनिधि गुड्डू चंद्रवंशी ने तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता से मुलाकात की ढेरों तस्वीरें खिंचवाईं और बड़े-बड़े दावे किए गए कि “जल्द कटेंगे लगान रसीद।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि उस वक्त सूबे में राजद (RJD) सत्ता में थी और मंत्री आलोक मेहता भी राजद कोटे से ही थे। राजद में गुड्डू चंद्रवंशी का बड़ा राजनीतिक रसूख भी है (जिसकी बानगी 2025 के विधानसभा चुनाव में उनके राजद प्रत्याशी बनने के रूप में दिखी)। लेकिन नतीजा क्या निकला? जब अपने ही दल की सरकार थी, अपना ही मंत्री था, तब भी बारह पत्थर की जनता को सिर्फ कोरे आश्वासन और अखबारों की कतरनें ही नसीब हुईं। उनका वह ज्ञापन महज एक कागजी खानापूर्ति और राजनीतिक स्टंट बनकर रह गया। यह स्पष्ट रूप से गुड्डू चंद्रवंशी की एक बड़ी राजनीतिक विफलता थी।

राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह के लिए यह महज पत्र नहीं, अग्निपरीक्षा है
अब गेंद मौजूदा विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह के पाले में है। लेकिन समीकरण देखिए, हालात आज भी कमोबेश 2023-24 जैसे ही हैं—बस चेहरे और पार्टियां बदल गई हैं। विधायक राजीव रंजन सिंह सत्तासीन एनडीए की सहयोगी पार्टी लोजपा (रामविलास) से आते हैं और जिन भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल को उन्होंने ज्ञापन सौंपा है, वह भी सत्तासीन दल (भाजपा) के ही हैं। यानी, एक बार फिर सत्ताधारी दल का सदस्य, सत्ताधारी मंत्री के दरबार में है।

लेकिन विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह को यह मुगालता नहीं पालना चाहिए कि सिर्फ एक पत्र सौंप देने और मंत्री जी को शॉल ओढ़ाकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें डाल देने भर से यह दशकों पुराना मसला हल हो जाएगा। समाहर्ता को जांच का आदेश देना नौकरशाही का पहला कदम होता है, और हम सब जानते हैं कि जांच के नाम पर फाइलें कैसे लाल फीताशाही में उलझकर सालों तक धूल फांकती हैं।

विधायक जी की असली परीक्षा अब शुरू होती है। अगर वह इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीतिक माइलेज लेने की होड़ में हैं, तो उन्हें गुड्डू चंद्रवंशी का हश्र याद रखना चाहिए। यदि विधायक जी इस मामले में तन-मन से नहीं लगे, अधिकारियों की चौखट पर डटकर पैरवी नहीं की, और इसे तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंचाया, तो यह नया पत्र भी उसी ‘ठंडे बस्ते’ में चला जाएगा जहां पुराने ज्ञापन पड़े हैं।

बारह पत्थर के छात्रों को, कन्या उत्थान जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, सरकारी नौकरी लेने में परेशानी, सरकारी अनुदान प्राप्त करने में समस्या। जनता अब वादे और अखबारों की कटिंग नहीं, बल्कि ज़मीन पर कटा हुआ रसीद देखना चाहती है। गुड्डू चंद्रवंशी इस मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हो चुके हैं। अब यह राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह के लिए महज़ एक पत्रकारीय औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी अग्निपरीक्षा है। देखना यह है कि वह इस परीक्षा में तपकर कुंदन बनते हैं या फिर पुरानी सियासत की तरह राख।

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