संस्थापक चन्दन कुमार ने जारी किया आधिकारिक पत्र; 5 साल का ‘लिखित विजन’, बेदाग छवि और कम से कम इंटर पास होना अनिवार्य।
डेहरी ऑन सोन | जन आक्रोश मीडिया
आगामी नगर निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा के ठीक बाद, सामाजिक संगठन ‘टीम डेहरीयंस’ ने स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। बीते रविवार (13 सितंबर) को संस्था के संस्थापक सह अध्यक्ष चन्दन कुमार ने वार्ड पार्षद उम्मीदवार चयन के लिए 15 सूत्रीय कड़े मापदंड जारी कर दिए हैं।

संस्था के आधिकारिक लेटरपैड पर जारी इन शर्तों को देखकर स्पष्ट है कि टीम डेहरीयंस डेहरी नगर परिषद क्षेत्र में केवल ‘नाम’ के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से ‘प्रोफेशनल और पारदर्शी’ व्यवस्था लागू करने के इरादे से मैदान में उतरी है।
कानूनी उम्र 21, लेकिन संस्था का मानक 25 वर्ष
इस 15-सूत्रीय मापदंड का सबसे चौंकाने वाला पहलू उम्र सीमा है। हालांकि चुनाव लड़ने की कानूनी न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, लेकिन संस्था ने परिपक्वता सुनिश्चित करने के लिए अपने उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष तय की है। इसके अलावा शिक्षा के मामले में कम से कम ‘इंटरमीडिएट’ पास होना अनिवार्य किया गया है, जबकि ‘स्नातक’ (ग्रेजुएट) को प्राथमिकता दी जाएगी।

टीम डेहरीयंस के उम्मीदवार चयन की प्रमुख और कड़ी शर्तें:
दस्तावेज़ के अनुसार, जो भी उम्मीदवार संस्था का समर्थन चाहेगा, उसे निम्नलिखित अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा:
- लिखित विजन: उम्मीदवार को सड़क, नाली, पानी, लाइट और पार्क आदि पर 5 वर्ष की कार्ययोजना (Vision) लिखित रूप में देनी होगी।
- बेदाग छवि: भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी या गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी छवि वालों के लिए नो-एंट्री। सरकारी योजनाओं में कमीशन का सख्त विरोध।
- स्थानीय और सुलभ: वार्ड का स्थायी निवासी होना जरूरी है। साथ ही, चुनाव के बाद भी नियमित रूप से जनता के बीच उपलब्ध रहने का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए।
- डिजिटल साक्षरता और पारदर्शिता: आज के दौर को देखते हुए उम्मीदवार को ‘सोशल मीडिया एवं डिजिटल जानकारी’ होना आवश्यक है। उसे अपनी संपत्ति और चुनावी खर्च की जानकारी भी पारदर्शी रखनी होगी।
- समावेशी दृष्टिकोण: जाति, धर्म या गुटबाजी से ऊपर उठकर काम करने वाला हो और महिला, बुजुर्ग एवं कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील हो।
राजनीतिक दलों के लिए खड़ी हुई चुनौती
टीम डेहरीयंस द्वारा जनसेवा के अनुभव, समस्या समाधान की प्रशासनिक क्षमता और आर्थिक पारदर्शिता जैसी शर्तों को अनिवार्य बनाने से डेहरी के उन पारंपरिक राजनेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जो केवल चुनाव के वक्त सक्रिय होते हैं।
इस 15 सूत्रीय एजेंडे ने यह साबित कर दिया है कि डेहरी का युवा अब सिर्फ ‘वोटर’ नहीं रहना चाहता, बल्कि वह खुद अपने लिए शिक्षित और ईमानदार नेतृत्व चुनने और गढ़ने की राह पर निकल पड़ा है।