जलजमाव पर सासाराम में आर-पार: जन सुराज उतरा सड़क पर, डेहरी के नेताओं को कब आएगी शर्म?

डेहरी/सासाराम | जन आक्रोश मीडिया

बिहार में नगर निकायों और अफसरशाही की संवेदनहीनता का आलम यह है कि जलजमाव और नारकीय जीवन को अब ‘सामान्य’ मान लिया गया है। आपको याद होगा, हाल ही में जन आक्रोश मीडिया ने छपरा नगर निगम की कार्यशैली का खुलासा किया था, जहाँ एक नागरिक की गंभीर शिकायत के लिखित जवाब में उप नगर आयुक्त ने बेशर्मी से कह दिया था कि “वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए वाटर लॉगिंग लाजमी है”। (विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें: Shhhh! जल जमाव की शिकायत ना करें, “ये तो सामान्य बात है”: छपरा नगर निगम)।

जब पूरे बिहार में प्रशासन का रवैया समस्याओं को ‘लाजमी’ बताकर पल्ला झाड़ने का हो गया हो, तब जनता के हकों के लिए सड़क पर उतरना ही सबसे बड़ा धर्म बन जाता है। इसी चेतना को जगाते हुए सासाराम नगर निगम क्षेत्र में व्याप्त जलजमाव की गंभीर समस्या पर आखिरकार किसी ने तो मुखर होकर आवाज उठाई है। ‘जन सुराज पार्टी’ ने सासाराम की बदहाली को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और एक बड़ा सवाल हमारे डेहरी के राजनीतिक दलों के सामने भी खड़ा कर दिया है।

टैक्स किस बात का, जब मूलभूत सुविधाएं ही नहीं?
जलजमाव केवल सड़क पर पानी जमा होने की समस्या नहीं है, यह नागरिकों के स्वास्थ्य, व्यापार और सामान्य जनजीवन पर सीधा प्रहार है। इसी बात को केंद्र में रखते हुए जन सुराज पार्टी के पूर्व पार्षद सह नेता अतेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में 15 सितंबर को सासाराम नगर निगम कार्यालय के समक्ष जोरदार शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया।

जन सुराज ने प्रशासन को 14 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया था। उनकी प्रमुख मांग है कि शहर में ड्रेनेज निर्माण फेज-2 पर तत्काल कार्रवाई शुरू की जाए और इसकी कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए। सबसे तार्किक मांग यह उठाई गई है कि सासाराम की जनता पूरे बिहार में म्यूटेशन में सबसे ज्यादा टैक्स देती है, इसलिए जब तक जलजमाव से स्थायी राहत नहीं मिलती, तब तक प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों के सभी नगर निगम टैक्स माफ किए जाएं। प्रशासन द्वारा कोई संज्ञान न लिए जाने पर जन सुराज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो बड़ा जन आंदोलन होगा और कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

डेहरी की राजनीतिक खामोशी पर उठते तीखे सवाल
सासाराम में जन सुराज ने ही सही, लेकिन जनता के दर्द को समझा और सड़क पर उतरकर प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके उलट डेहरी का परिदृश्य बेहद निराशाजनक है। डेहरी में भी टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां और जल निकासी का घोर अभाव है, जिससे आम नागरिक हर दिन जूझ रहा है। लेकिन यहाँ के प्रमुख राजनीतिक दल, पक्ष-विपक्ष के नेता और संगठन रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं।

डेहरी के राजनेताओं की सक्रियता क्या केवल चुनावों के समय या सोशल मीडिया तक ही सीमित है? क्या डेहरी के नेताओं को सासाराम के इस जन-आंदोलन से कोई सीख नहीं लेनी चाहिए? डेहरी की जनता अब यह पूछने लगी है कि क्या उन्हें भी अपने अधिकारों के लिए ऐसे ही किसी आंदोलन का इंतजार करना होगा, या यहाँ के नेता कभी खुद आगे आकर जन सरोकार की आवाज बनेंगे?

आंदोलन में शामिल प्रमुख चेहरे:
इस धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पार्षद सह पूर्व जिला महामंत्री अतेंद्र कुमार सिंह और संचालन जिला महामंत्री अशोक भारती ने किया। जन सरोकार के इस महत्वपूर्ण आंदोलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई: प्रियंका सिंह (जिला महिला अध्यक्ष), बलजीत सिंह यादव (जिला युवा अध्यक्ष), हीरालाल सिंह कुशवाहा (शाहाबाद ओबीसी प्रभारी सह पूर्व जिला अध्यक्ष), सचिदानंद सिंह (जिला कार्यालय प्रभारी), बीरेन्द्र सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ), चुनचुन सिंह (प्रदेश किसान उपाध्यक्ष), सुकांति सिंह (वार्ड संख्या 17 की पार्षद), विक्की राव पाण्डेय (जिला युवा नेता), विजय शंकर तिवारी (पूर्व प्रखंड अध्यक्ष, चेनारी), मुकेश सिंह (चेनारी विधानसभा प्रभारी), अनिल यादव (महामंत्री, रोहतास), जवाहर चौबे (करगहर), आशुतोष तिवारी (अधिवक्ता), अन्य प्रमुख सहयोगी: सुधीर सिंह, संतोष तिवारी, बीनू सिंह, हिमांशु यादव, विशाल कुमार, सुशील कुमार, बिन्देश्वर शर्मा, विवेकानंद सिंह, संजीव कुमार सिन्हा, संकेत कुमार सिन्हा, जय प्रकाश सिंह, सुरेंद्र सिंह, बबलू चंद्रवंशी, छोटन चंद्रवंशी सहित सैकड़ों जन सुराजी।

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