डेहरी के ‘पड़ाव मैदान’ में लगेगा बायोगैस प्लांट, जारी हुआ टेंडर

डेहरी ऑन सोन (रोहतास) | विशेष संवाददाता

शहर के बीचों-बीच स्थित रक्षा संपदा (डिफेंस एस्टेट) की भूमि, जिसे स्थानीय लोग ‘पड़ाव मैदान’ के नाम से जानते हैं, जल्द ही एक बड़े औद्योगिक स्वरूप में बदलने वा है। दानापुर स्थित रक्षा संपदा कार्यालय (DEO) ने इस बहुमूल्य खाली जमीन पर एक विशाल कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने के लिए टेंडर (RFP) जारी कर दिया है। (Tender से संबन्धित दस्तावेज़ के लिए यहाँ क्लिक करें।)

एक तरफ इस परियोजना को शहर के कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ इस फैसले ने उन सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है, जिनकी आजीविका इसी जमीन पर आश्रित है। इस मैदान पर लंबे समय से बड़े पैमाने पर सब्जी और किराना का अस्थाई (तह) बाजार लगता है और कई पक्की-कच्ची दुकानें भी मौजूद हैं। प्लांट के निर्माण का सीधा अर्थ है कि इन सभी दुकानदारों को जल्द ही यहां से हटना पड़ेगा।

कितने हिस्से में लगेगा यह प्लांट?
टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, यह बायोगैस संयंत्र पड़ाव मैदान की 16.71 एकड़ भूमि पर लगाया जाएगा। (दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि भविष्य की जरूरतों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 50 एकड़ तक हो सकती है)। यह प्लांट प्रतिदिन 8.535 टन (TPD) कंप्रेस्ड बायो-गैस का उत्पादन करेगा, जिसे 24 महीने में तैयार कर 25 वर्षों तक संचालित किया जाना है।

क्या है अधिग्रहण और मुआवजे की स्थिति?
इस पूरी परियोजना में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वर्षों से यहां रोजगार कर रहे दुकानदारों का क्या होगा? क्या उन्हें कोई मुआवजा या पुनर्वास मिलेगा?

टेंडर (RFP) दस्तावेजों के गहन अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि जमीन अधिग्रहण या किसी भी प्रकार के मुआवजे का कोई प्रावधान इसमें नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह भूमि किसी निजी किसान या रैयत की नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय (Defence Estates Office) के स्वामित्व में है

टेंडर की शर्तों के अनुसार, रक्षा संपदा कार्यालय चयनित कंपनी (Concessionaire) को प्लांट के लिए ‘शांतिपूर्ण और बाधारहित कब्जा’ (peaceful unencumbered access to and possession) सौंपेगा। कानूनी दृष्टिकोण से, ऐसी सरकारी जमीन पर लगी दुकानों को अतिक्रमण माना जाता है। इसलिए, विभाग द्वारा निर्माण कार्य शुरू होने से पूर्व इस पूरी 16.71 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा और इसके लिए किसी प्रकार के आर्थिक मुआवजे की कानूनी बाध्यता टेंडर में शामिल नहीं की गई है।

अब देखना यह है कि स्वच्छ ऊर्जा और विकास के इस महत्वपूर्ण कदम के साथ-साथ, प्रशासन इन सैकड़ों प्रभावित गरीब दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं के पुनर्वास के लिए स्थानीय स्तर पर कोई मानवीय पहल करता है या नहीं।

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