डेहरी को रेल अनुमंडल बनाने की मांग तेज, टीम डेहरीयंस ने उठाई आवाज

रेलवे डाक सेवा और बड़े स्तर के रेल परिचालन का केंद्र होने का हवाला; डेहरी-बरवाडीह, डेहरी-गया और डेहरी-डीडीयू रेलखंडों को मिल सकता है बेहतर स्थानीय प्रबंधन

डेहरी ऑन सोन | जन आक्रोश मीडिया

डेहरी ऑन सोन को रेलवे का ‘रेल अनुमंडल’ (Railway Sub-Division) बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। ‘टीम डेहरीयंस’ ने इस मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा है कि डेहरी को रेलवे के स्थानीय प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाए जाने से न केवल क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि दक्षिण बिहार के विकास को भी नई गति मिल सकती है।

संगठन का कहना है कि डेहरी ऑन सोन एक ऐतिहासिक और रणनीतिक रेलवे जंक्शन है। यहां रेलवे से जुड़ी गतिविधियां बड़े स्तर पर संचालित होती हैं और यह क्षेत्र डेहरी-बरवाडीह, डेहरी-गया तथा डेहरी-डीडीयू जैसे महत्वपूर्ण रेल संपर्कों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में रेलवे के स्थानीय प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए डेहरी को रेल अनुमंडल का दर्जा देने पर विचार किया जाना चाहिए।

क्यों उठी डेहरी को रेल अनुमंडल बनाने की मांग?

टीम डेहरीयंस के अनुसार डेहरी ऑन सोन की भौगोलिक स्थिति और रेल परिचालन में इसकी भूमिका इसे स्थानीय रेलवे प्रशासन के लिए उपयुक्त केंद्र बनाती है। संगठन का तर्क है कि यदि रेलवे के संचालन, रखरखाव और तकनीकी कार्यों से जुड़े अधिकारियों की पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था डेहरी में विकसित होती है, तो स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान में तेजी आ सकती है।

इससे ट्रैक, सिग्नलिंग, परिचालन, रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय की संभावना बनेगी।

आखिर क्या होता है ‘रेल अनुमंडल’?

रेलवे प्रशासन में जोन और मंडल की व्यवस्था व्यापक रूप से जानी जाती है। मंडल के अंतर्गत अलग-अलग क्षेत्रों में परिचालन, इंजीनियरिंग, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए विभिन्न स्तरों के अधिकारी एवं इकाइयां कार्य करती हैं।

हालांकि, ‘रेल अनुमंडल’ शब्द रेलवे की सभी जगहों पर एक समान प्रशासनिक इकाई के रूप में लागू हो, ऐसा जरूरी नहीं है। रेलवे में विभिन्न विभागों और कार्यक्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रशासनिक एवं तकनीकी संरचनाएं होती हैं।

इसलिए डेहरी को रेल अनुमंडल बनाने की मांग का वास्तविक स्वरूप रेलवे द्वारा निर्धारित प्रशासनिक ढांचे और संबंधित विभागों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

यह व्यवस्था GRP (राजकीय रेलवे पुलिस) के रेल पुलिस अनुमंडल से भी अलग होगी। GRP का मुख्य दायित्व रेलवे परिसर और ट्रेनों में कानून-व्यवस्था एवं अपराध नियंत्रण से संबंधित है, जबकि रेलवे के परिचालन और तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन के संबंधित विभागों की होती है।

डेहरी को रेल अनुमंडल का दर्जा मिलने से क्या फायदा हो सकता है?

1. स्थानीय स्तर पर तेज निर्णय

रेल परिचालन, ट्रैक, सिग्नलिंग अथवा अन्य तकनीकी समस्याओं के मामले में स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी से निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक तेज हो सकती है।

2. रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेहतर निगरानी

स्थानीय स्तर पर रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों और तकनीकी तंत्र की मजबूती से नए प्रोजेक्टों, रखरखाव तथा लंबित कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है।

3. यात्री सुविधाओं में विस्तार

डेहरी एक महत्वपूर्ण जंक्शन होने के कारण यहां यात्री सुविधाओं, स्टेशन प्रबंधन और ट्रेनों से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर अधिक प्रभावी तरीके से काम किया जा सकता है।

4. माल परिवहन को मिल सकता है बढ़ावा

डेहरी और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए रेल माल परिवहन की सुविधाओं को मजबूत करना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

5. आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय

दुर्घटना, तकनीकी खराबी या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तकनीकी एवं प्रशासनिक तंत्र राहत और परिचालन बहाली में मददगार हो सकता है।

सिर्फ डेहरी नहीं, पूरे दक्षिण बिहार के लिए महत्वपूर्ण मांग

टीम डेहरीयंस का मानना है कि डेहरी को रेलवे के स्थानीय प्रशासनिक एवं तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग को केवल स्थानीय सुविधा के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

डेहरी से जुड़े विभिन्न रेल मार्ग दक्षिण बिहार के बड़े भू-भाग को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ते हैं। ऐसे में यहां रेलवे प्रशासन की स्थानीय क्षमता बढ़ने से डेहरी, रोहतास, औरंगाबाद, गया तथा आसपास के क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।

संगठन ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि डेहरी की रेल संबंधी भूमिका, यात्री एवं माल परिचालन, भौगोलिक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यहां उपयुक्त रेलवे प्रशासनिक/तकनीकी इकाई विकसित करने की संभावना का अध्ययन किया जाए।

मांग को लेकर जुटे टीम डेहरीयंस के कार्यकर्ता

इस अवसर पर टीम डेहरीयंस के संस्थापक सह अध्यक्ष चन्दन कुमार के साथ आर.के. सिंह, अमित कुमार, गौतम कुमार कुंडू, लाल बहादुर सिंह, संतोष कुमार, आयुष कुमार, सुमित कुमार, रवि कुमार, राजन गुप्ता, बिट्टू गुप्ता, धनंजय कुमार, अमित सोनी, मिन्टू गुप्ता, दिलशाद आलम, विक्रम मिश्रा, अंकित सिंह, पताली यादव, औरंगजेब खान, बालाजी, विनय गुप्ता, माधव यादव, आशीष सोनी, जीतेन्द्र यादव, गोविन्द गुप्ता, विपुल राज, सुनील कुमार, शक्ति गुप्ता, राज कुमार सिंह और प्रवीण शर्मा सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में डेहरी को रेलवे के मजबूत स्थानीय प्रशासनिक एवं तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग को जायज बताते हुए इसे आगे भी प्रमुखता से उठाने की बात कही।

One thought on “डेहरी को रेल अनुमंडल बनाने की मांग तेज, टीम डेहरीयंस ने उठाई आवाज

  1. टीम डेहरियंस के सभी मांग जायज है और सभी मानकों को पूरी भी करती है जैसे डेहरी को जिला बनाना डालमियानगर कारखाना चालू करना डेहरी में प्रस्तावित एयरपोर्ट सुअरा हवाई अड्डा चालू करना रेल मंडल बनाना डेहरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव वाशिंग पिट निर्माण प्लेटफॉर्म बढ़ाने का काम सुद्ध और स्वच्छ जल शौचालय वेटिंग हॉल उतर साईड टिकट घर इन सभी मांग को वर्षों से की जा रही है मगर बिहार सरकार और डीडीयू मंडल के भ्रष्ट अधिकारी के नाकामी की वजह से सब अधर में लटकी हुई है डेहरी के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है आखिर क्यों जनता को सुविधा से दूर कर के रखी है जनता में भारी आक्रोश है सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री जी डेहरी को जिला घोषित करे और डीडीयू मंडल के अधिकारी जल्द से जल्द डेहरी स्टेशन के बिकास कार्य को शीघ्र पूरा करें

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