सरकारी चक्कर! घर बैठे ‘डिजिटल ब्रह्मास्त्र’ उपयोग कीजिये

जन आक्रोश मीडिया | डेहरी/पटना

ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक, और बैंक से लेकर पुलिस स्टेशन तक… आम आदमी जब भी अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ता है, तो उसे अक्सर तारीख, टालमटोल या ‘बाबू’ की फटकार ही मिलती है। एक आम नागरिक जो लचर व्यवस्था का शिकार है, वह लड़ना तो चाहता है, लेकिन उसे पता ही नहीं होता कि शिकायत कैसे और कहाँ करनी है।

अगर आप भी राशन कार्ड में नाम कटने, जमीन के दाखिल-खारिज में हो रही देरी, पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज न करने या बैंक में अटके पैसे से परेशान हैं, तो अब आपको किसी के आगे हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है।

जन आक्रोश मीडिया आज आपको उन ‘डिजिटल ब्रह्मास्त्रों’ के बारे में बता रहा है, जो सीधे आपकी बात प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुँचाते हैं। आइए जानते हैं इनके नियम, कायदे और अधिकार क्षेत्र।

AI GENERATED

पहला ब्रह्मास्त्र: PGPortal (केंद्र सरकार के मामलों के लिए)

यह पोर्टल (pgportal.gov.in) केंद्र सरकार का आधिकारिक शिकायत निवारण मंच है। अगर आपकी समस्या केंद्र सरकार के किसी विभाग से जुड़ी है, तो यह पोर्टल आपके लिए सबसे बड़ा हथियार है।

कहाँ चलेगा यह ब्रह्मास्त्र? (अधिकार क्षेत्र)

  • बैंक और वित्त: किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक (SBI, PNB, ICICI आदि) में फ्रॉड, अकाउंट फ्रीज होना, बैंक कर्मचारियों का दुर्व्यवहार, बिना वजह भटकाना (टालमटोल), भ्रष्टाचार या बीमा कंपनी की मनमानी, इत्यादि।
  • रेलवे और पोस्ट ऑफिस: ट्रेन में सुविधा का अभाव, टिकट रिफंड न होना या पोस्ट ऑफिस से पार्सल गायब होना, इत्यादि।
  • टेलीकॉम और पेट्रोलियम: मोबाइल नेटवर्क (Jio, Airtel, BSNL इत्यादि) की मनमानी या गैस एजेंसी (HP, Indane, Bharat Gas) द्वारा सिलेंडर की डिलीवरी में की जा रही अनावश्यक देरी या कालाबाजारी, इत्यादि।
  • अन्य: पासपोर्ट ऑफिस, इनकम टैक्स और EPFO (पीएफ) से जुड़ी समस्याएं। आप केंद्र सरकार से संबन्धित किसी भी मंत्रालय/विभाग को किसी भी प्रकार की शिकायत कर सकते हैं।

प्रक्रिया: पोर्टल पर जाएं, अपना मोबाइल नंबर, ईमेल डालकर रजिस्टर करें और सीधे अपनी शिकायत टाइप करें। यह पूरी तरह से ऑनलाइन है; आपको किसी अधिकारी के सामने पेश नहीं होना पड़ता। 30 दिन के भीतर विभाग के उच्च अधिकारी को आपकी समस्या का समाधान करके रिपोर्ट देनी होती है।

दूसरा ब्रह्मास्त्र: ‘सहयोग’ पोर्टल (बिहार सरकार के मामलों के लिए)

अगर आपकी समस्या राज्य सरकार के अधीन है, तो दिल्ली (केंद्र) में शिकायत करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए बिहार सरकार ने सहयोग पोर्टल (sahyog.bihar.gov.in) लागू किया है। यह पोर्टल बिल्कुल केंद्र के PGPortal की तर्ज पर काम करता है। इसमें भी आपको किसी अधिकारी के सामने पेश (Physical Appearance) होने की जरूरत नहीं है।

कहाँ चलेगा यह ब्रह्मास्त्र? (अधिकार क्षेत्र)

  • जमीन और राजस्व: दाखिल-खारिज (Mutation) में सीओ (CO) की मनमानी, जमीन की पैमाइश में अड़चन, इत्यादि।
  • पुलिस-प्रशासन: थानेदार द्वारा शिकायत दर्ज न करना, या मामले को रफा-दफा करने की कोशिश, इत्यादि।
  • बुनियादी सुविधाएं: बिजली विभाग का गलत बिल, नगर परिषद/निगम द्वारा सफाई न करना, टूटी सड़कें या नाले का निर्माण न होना, इत्यादि।
  • योजनाओं में धांधली: राशन डीलर की मनमानी, वृद्धावस्था पेंशन या आवास योजना का पैसा न मिलना, इत्यादि।
  • अन्य: आप बिहार सरकार के किसी भी विभाग से संबन्धित शिकायत हेतु इस ब्रह्मास्त्र का उपयोग कर सकते हैं।

अपवाद (कहाँ काम नहीं करेगा? pgportal एवं sahyog portal):

  • जो मामले किसी कोर्ट में चल रहे हों (न्यायाधीन मामले)।
  • सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े मामले।
  • पारिवारिक और संपत्ति के निजी विवाद।
  • सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले।

खास स्थिति: जब आमने-सामने की सुनवाई हो जरूरी (लोक शिकायत)

अगर ‘सहयोग’ पोर्टल पर भी आपकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं, तब बिहार का ‘लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ (lokshikayat.bihar.gov.in) काम आता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ डेस्क पर कंप्यूटर के जरिए शिकायत बंद नहीं होती, बल्कि बाकायदा एक तारीख मिलती है। आपको और उस अधिकारी के आमने-सामने बैठकर अपना पक्ष रखना होता है और अधिकतम 60 कार्य दिवसों में फैसला सुनाया जाता है।

जन आक्रोश मीडिया की विशेष ‘रणनीति’ (स्मार्ट टिप)

कई बार लोग शिकायत करते हैं कि “मैंने फलां विभाग में RTI लगाई थी, जवाब नहीं मिला, सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर रहा हूँ।” ऐसी शिकायतें तुरंत खारिज कर दी जाती हैं, क्योंकि RTI के लिए ‘राज्य सूचना आयोग’ अलग से बना है।

स्मार्ट तरीका: अगर विभाग लगातार आपके RTI आवेदनों को इग्नोर कर रहा है, तो पोर्टल पर RTI का जवाब मत मांगिए। बल्कि शिकायत में लिखिए— “संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार सूचना छुपाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और कार्य में विफलता है। इसकी उच्च स्तरीय जांच हो।” इस तरह से ड्राफ्ट की गई शिकायत को अधिकारी आसानी से खारिज नहीं कर पाते।

निष्कर्ष: व्यवस्था तब तक लचर रहती है, जब तक नागरिक चुप रहते हैं। इन पोर्टल्स का इस्तेमाल मुफ्त है और यह आपका अधिकार है। आज ही अपने स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल करें, डिजिटल बनिए और सीधे सिस्टम से सवाल पूछिए। ‘डिजिटल गांधीगिरी’ कीजिये।

Leave a Reply