डेहरी ऑन सोन | जन आक्रोश मीडिया
शहर के शंकरपुर, बडीहा स्थित डंपिंग ग्राउंड में दशकों से पड़े लगभग 2.18 लाख टन पुराने कचरे (Legacy Waste) के नीचे से एक विस्फोटक मामला संज्ञान में आ रहा है। जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता के आरोपों के बाद वैज्ञानिक निस्तारण के नाम पर हुए एक बड़े कथित घोटाले की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अब तक फाइलों और अधिकारियों के बंद कमरों में दफ्न 9 करोड़ रुपये के इस ‘बायो-माइनिंग’ प्रोजेक्ट पर उठे सवालों का बिगुल जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सांकृत ने फूंक दिया है।

हाल ही में एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म सत्य टीवी बिहार को दिए गए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अभिषेक सांकृत ने इस मुद्दे को पहली बार सार्वजनिक पटल पर रखा। इस सनसनीखेज़ खुलासे के बाद ‘जन आक्रोश मीडिया’ ने अभिषेक सांकृत जी से सीधे संपर्क किया। हमसे हुई विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है। वे बहुत जल्द एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने वाले हैं, जिसमें इस पूरे कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ों और सुबूतों को सिलसिलेवार ढंग से जनता के सामने रखा जाएगा।
अभी तक आम जनता और मुख्यधारा की नज़रों से ओझल यह मामला अब धीरे-धीरे लाइमलाइट में आ रहा है। शुरुआती जानकारी और पड़ताल के आधार पर इस कथित घोटाले के जो बिंदु उभर कर सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:
- कागज़ों पर निस्तारण, ज़मीन पर हेराफेरी?: प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस डंपिंग ग्राउंड को साफ़ करने का लगभग 9.26 करोड़ रुपये का टेंडर असम की एक प्रोपराइटरशिप फर्म को दिया गया था। कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के तहत जून 2024 से लेकर एक साल के भीतर इस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण (बायो-माइनिंग) होना था। लेकिन आरोप है कि ज़मीन पर कोई आधुनिक मशीनरी लगाने से पहले ही कचरे के एक बड़े खंड को ठिकाने लगा दिया गया था।
- सोन नदी और गंगा नदी के अस्तित्व पर प्रहार: इस कथित घोटाले का सबसे खतरनाक पहलू पर्यावरणीय है। आरोप है कि बिना प्रोसेस किए गए कच्चे कचरे का एक बड़ा हिस्सा मकराईन और उसके आस-पास सोन नदी के किनारों पर डंप कर दिया गया था। अगर यह सच है, तो यह सीधे तौर पर NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों की धज्जियां उड़ाने और क्षेत्र की जीवनदायिनी सोन नदी में ज़हरीला ‘लीचेट’ घोलने का एक बड़ा आपराधिक कृत्य है। साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से देश की सबसे बड़ी और आस्था के केंद्र गंगा नदी को प्रदूषित करने का भी बड़ा मामला है।
- क्या ईओ विमल कुमार की हत्या से जुड़ रहे हैं तार?: इस पूरे प्रकरण में जो सबसे खौफनाक सवाल उठ रहा है, वह डेहरी के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी (EO) विमल कुमार की जघन्य हत्या से जुड़ा है। अभिषेक सांकृत के आरोपों के बाद दबी ज़ुबान में अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या ईओ विमल कुमार पर इसी 9 करोड़ रुपये के ‘बायो-माइनिंग’ प्रोजेक्ट के फर्जी बिल पास करने का दबाव था? आरोप है कि कथित रूप से जब उन्होंने इस भ्रष्ट सिस्टम के आगे झुकने से इनकार कर दिया तो इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी? अभिषेक सांकृत द्वारा उठाए गए सवालों ने इस थ्योरी (Motive) को एक नई और गंभीर दिशा दे दी है।
ये भी पढ़ें: डेहरी को जिला: सचिवालय में खुली फाइल, विभाग ने दिया आधिकारिक जवाब
आगे क्या?
यह पूरा मामला अभी अपने शुरुआती दौर में है और कानूनी रूप से इसे एक ‘कथित घोटाला’ ही माना जा सकता है। प्रशासन और पुलिस की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सभी की निगाहें अभिषेक सांकृत की उस आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां इस पूरे नेक्सस की परतें खुलने की उम्मीद है।
‘जन आक्रोश मीडिया’ इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है और ज़मीनी स्तर से जुड़े हर अपडेट को पूरी ज़िम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाता रहेगा।