डेहरी ऑन सोन । जन आक्रोश मीडिया
बिहार कैबिनेट द्वारा रोहतास और कैमूर क्षेत्र में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए ‘भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण’ (AAI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) को मंजूरी दिए जाने के बाद से पूरे दक्षिण बिहार में उत्साह और विमर्श का माहौल है। इस बीच, क्षेत्र के ही माटी के लाल, सफल उद्यमी और जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सांकृत का एक बेहद वैज्ञानिक और डेटा-संचालित विजन सामने आया है, जो इस परियोजना को देश की सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धि में बदल सकता है।

जन आक्रोश मीडिया से बात करते हुए अभिषेक सांकृत ने बताया कि डेहरी में अंतर्राष्ट्रीय कार्गो एयरपोर्ट बने इसके लिए उन्होंने अनेक प्रयास किए, उन्होने सरकार के सामने एक ऐसी ‘फूल-प्रूफ’ योजना रखी हैं जिससे यह हवाई अड्डा कभी ‘फेल’ ही न हो। उनका स्पष्ट मानना है कि रोहतास (विशेषकर डेहरी) में बनने वाला यह हवाई अड्डा विशुद्ध रूप से सिर्फ पैसेंजर (नागरिक) हवाई अड्डा न होकर एक ‘हाइब्रिड मॉडल‘ (मुख्यतः कार्गो हब, जिसमें नागरिक उड़ानों के लिए स्लॉट हों) होना चाहिए। वे अपने विजन को सिर्फ बता ही नहीं रहे बल्कि वे 2024 से लगातार समय-समय पर संबंधित मंत्रालय एवं विभागों को ईमेल भी लिख रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे वर्ष 2012 में तत्कालीन लोकसभा स्पीकर व तत्कालीन सासाराम सांसद मीरा कुमार जी से भी इस विषय को लेकर औपचारिक रूप से मिल चुके हैं।
तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का ‘त्रिकोण‘: क्या डेहरी भी बनेगा कुशीनगर-प्रयागराज?
अभिषेक सांकृत ने अपने विजन डॉक्यूमेंट के बारे में बताते हुए एक बेहद तीखा और तार्किक वैज्ञानिक सवाल उठाया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि रोहतास एक ऐसे भौगोलिक त्रिकोण (Triangle) में फंसा है, जिसके चारों तरफ 100 से 200 किलोमीटर की परिधि में पहले से ही 3-3 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे मौजूद हैं:
- वाराणसी (लाल बहादुर शास्त्री) हवाई अड्डा
- पटना (जयप्रकाश नारायण) हवाई अड्डा
- गया जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
अभिषेक जी का कहना है:
“अगर हम डेहरी में केवल एक पैसेंजर हवाई अड्डा बनाते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि यहाँ के लोग पहले से ही वाराणसी, पटना और गया के हवाई अड्डों का उपयोग कर रहे हैं। यहाँ तक कि गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी व्यावहारिक धरातल पर बहुत कम उड़ानों (फ्लाइट्स) के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में हमें डर है कि केवल पैसेंजर श्रेणी में रखने से डेहरी हवाई अड्डा भी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर या प्रयागराज जैसी स्थिति में न आ जाए, जो बुनियादी ढांचा होने के बावजूद उड़ानों के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं।”
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सस्ता प्रोजेक्ट, महंगी उपयोगिता: बिहार और डेहरी ही क्यों?
जब यह सवाल उठा कि देश के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार और विशेषकर डेहरी को ही देश का पहला समर्पित कार्गो-हाइब्रिड हब क्यों चुना जाए, तो अभिषेक सांकृत ने अकाट्य राष्ट्रीय तर्क सामने रखे:
- देश की पहली उपलब्धि: भारत में वर्तमान में कोई भी शुद्ध कार्गो हवाई अड्डा नहीं है; हर जगह पैसेंजर उड़ानों के बीच कार्गो को जगह दी जाती है। डेहरी में यह शुरुआत भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक क्रांति होगी।
- सस्ती प्रोजेक्ट कॉस्ट: दिल्ली-मुंबई या पटना के मुकाबले डेहरी और आस-पास के क्षेत्रों में जमीनें काफी सस्ती हैं। इससे सरकार का भूमि अधिग्रहण का बजट बचेगा और प्रोजेक्ट कॉस्ट बेहद कम आएगी।
- ईस्ट-वेस्ट पैसेज और अंतरराष्ट्रीय सीमा: बिहार की सीमा नेपाल से बेहद करीब है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार (लॉजिस्टिक्स) को बढ़ावा देगी। साथ ही, यह क्षेत्र ईस्ट और वेस्ट इंडिया को जोड़ने वाले मुख्य पैसेज में आता है और झारखंड-ओडिशा जैसे रेयर अर्थ व खनिज संपदा से भरपूर राज्यों के मुहाने पर है।
लाखों रोजगार और नई इंडस्ट्री का हब:
अभिषेक जी पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि डेहरी में मुख्य रूप से कार्गो हवाई अड्डा बनने से न केवल रोहतास बल्कि पूरा क्षेत्र (कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद) एक विशाल ‘वेयरहाउस क्षेत्र‘ (Logistics & Warehousing Hub) के रूप में विकसित हो जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के ऐतिहासिक अवसर उत्पन्न होंगे।
उनका कहना है कि आज दुनिया भर की तमाम बड़ी कंपनियां अपनी विनिर्माण इकाइयां (Factories) सिर्फ ऐसे स्थानों पर लगाना पसंद करती हैं, जहाँ से वे अपने तैयार उत्पादों को न्यूनतम समय में वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट (निर्यात) कर सकें। जब डेहरी में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों वाला कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होगा, तो देश-विदेश की भारी इंडस्ट्रीज खुद-ब-खुद इस क्षेत्र की तरफ आकर्षित होंगी, जिससे दक्षिण बिहार के साथ-साथ इसके चहुँ ओर का पूरा आर्थिक परिदृश्य बदल जाएगा।
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वैज्ञानिक सुरक्षा: भूकंपीय जोन 3 और पानी का बाहुल्य
इस खोजी वार्तालाप में अभिषेक जी ने एक और बड़ा भू-वैज्ञानिक तथ्य उजागर किया। जब तुलना की गई कि मध्य प्रदेश, ओडिशा या झारखंड जैसे राज्य भूकंपीय दृष्टि से ‘जोन 2’ (बेहद सुरक्षित) में आते हैं, तो रोहतास (जोन 3) क्यों बेहतर है?
अभिषेक जी ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया:
“जोन 2 में आने वाले अधिकांश राज्य या तो पहले से ही ओवर-क्राउडेड (अत्यधिक आबादी वाले) हैं, या वे भीषण वन क्षेत्रों से घिरे हैं जहाँ पर्यावरण क्लियरेंस मिलना मुश्किल है, या फिर वे ‘डे ज़ीरो’ (पानी की भारी कमी) के कगार पर हैं। इसके विपरीत, हमारा रोहतास और डेहरी क्षेत्र पूरी तरह समतल मैदान है, यहाँ वन क्षेत्र की बाधा कम है, यह DFC (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) और राष्ट्रीय राजमार्गों से पूरी तरह जुड़ा है तथा यहाँ दो-दो नए एक्सप्रेसवे भी प्रस्तावित हैं। सबसे बड़ी बात, सोन नदी की वजह से हमारा क्षेत्र पानी के मामले में समृद्ध (Water Abundant) है, जो किसी भी बड़े विमानन और औद्योगिक परिसर के लिए अनिवार्य है।”
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निष्कर्ष: व्यवस्था परिवर्तन का असली रोडमैप
टूर एंड ट्रेवल्स उद्योग से जुड़े होने और बी.एच.यू. के पर्यटन प्रबंधन अध्ययन बोर्ड में शामिल होने के कारण अभिषेक सांकृत ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की नब्ज को बहुत अच्छे से समझते हैं। जन सुराज के माध्यम से जिस ‘व्यवस्था परिवर्तन’ और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की बात वे करते हैं, यह हाइब्रिड हवाई अड्डे का प्रस्ताव उसी सोच का एक ठोस और धरातलीय प्रमाण है।
कैबिनेट के फैसले को यदि अभिषेक जी के इस हाइब्रिड विजन के साथ जोड़ दिया जाए, तो डेहरी को उसका खोया हुआ “पूर्व का मैनचेस्टर” का गौरव वापस मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।
– जन आक्रोश ब्यूरो रिपोर्ट