जनरल कायर को एक पल भी पद पर रहने का अधिकार नहीं: डॉ. शैलेश सागर

कांग्रेस नेता डॉ. शैलेश सागर ने दिल्ली में हुए हालिया छात्र आंदोलन पर पुलिसिया बर्बरता की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री का तत्काल इस्तीफा मांगा है। 20 जुलाई को राजधानी की सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्रों पर हुए क्रूर लाठीचार्ज को उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ‘काला अध्याय’ करार दिया।

अपने तीखे और भावुक बयान में उन्होंने एक ऐतिहासिक तुलना करते हुए कहा:

“जिस तरह 1919 में जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में निहत्थे और बेकसूर लोगों पर गोलियां चलवाई थीं, ठीक उसी तरह आज सत्ता के अहंकार में अंधे हो चुके ‘जनरल कायर’ ने अपने हक की आवाज़ उठा रहे निहत्थे बच्चों पर लाठियां बरसवाई हैं। यह लाठीचार्ज केवल छात्रों के शरीर पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य और संविधान की आत्मा पर किया गया वार है।”

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डॉ. सागर के वक्तव्य के मुख्य और ज्वलंत अंश:

  • छात्र देश का भविष्य हैं, दुश्मन नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया कि जो सरकार अपने ही देश के युवाओं, छात्रों और रोजगार मांगने वालों को अपना दुश्मन समझने लगे, उसका नैतिक पतन हो चुका है। हाथ में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने लिए इन युवाओं को पुलिस के बूटों तले रौंदना सत्ता की कायरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
  • तानाशाही का खुला प्रदर्शन: डॉ. सागर ने सरकार की कार्यशैली को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि लाठी, आंसू गैस और पुलिस के बल पर युवाओं की जायज आवाज़ को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।
  • इस्तीफे की मांग: उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दमनकारी कार्रवाई की सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की है। इस बर्बरता को देखते हुए प्रधानमंत्री को नैतिकता के आधार पर एक पल भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है और उन्हें पूरी कैबिनेट भंग करते हुए अविलंब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
  • आंदोलन की गूंज और आगे की राह: परसों दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण छात्र प्रोटेस्ट अब महज़ एक घटना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी आक्रोश का प्रतीक बन गया है। डॉ. शैलेश सागर का यह बयान उस गुस्से की नुमाइंदगी करता है जो सड़कों पर लहूलुहान हुए छात्रों की तस्वीरें देखने के बाद आम जनमानस में उबल रहा है।

उन्होंने अपने वक्तव्य का समापन इस कड़ी चेतावनी के साथ किया, “आज आपने जिन युवाओं की आवाज़ को लाठियों से कुचलने का प्रयास किया है, कल वही युवा एकजुट होकर इस निरंकुश सत्ता की नींव हिला देंगे। इतिहास गवाह है कि जब-जब युवा सड़कों पर उतरा है, बड़े-बड़े तानाशाहों के तख्त पलट गए हैं।”

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