“शिक्षा व्यवस्था तबाह, मंत्री का इस्तीफा और PM की माफी पर कोई समझौता नहीं”: राहुल गांधी

नई दिल्ली | जन आक्रोश मीडिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में जारी पेपर लीक विवाद, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जो भारतीय शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया भर में मिसाल मानी जाती थी, वह आज पूरी तरह ‘रिग्ड’ (धांधली वाली) हो चुकी है।

राहुल गांधी ने सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लाखों छात्रों का पूर्ण समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा और सरकार के सामने तीन गैर-नेगोशिएबल (अपरिवर्तनीय) मांगें रखी हैं।

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छात्रों के आक्रोश के 3 मुख्य कारण

पूरी प्रेस वार्ता यहाँ देखें

प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा और छात्र अकारण सड़कों पर नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे तीन गहरे संरचनात्मक कारण हैं:

  • पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला: पिछले 10 वर्षों में देश भर में 152 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ से ज्यादा छात्र और उनके परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 10 वर्षों में 152 लीक्स के बावजूद एक भी मामले में किसी को सजा (Zero Convictions) नहीं हुई है।
  • अत्यधिक महंगी और शोषक शिक्षा: मध्यवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए शिक्षा पाना कठिन होता जा रहा है। राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत सरकार का कुल शिक्षा बजट जहाँ करीब ₹1.4 लाख करोड़ है, वहीं अकेले NEET परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र और उनके परिवार लगभग ₹1.32 लाख करोड़ खर्च कर देते हैं।
  • रोजगार के रास्ते बंद: पढ़ाई पूरी करने के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बदहाली, छोटे व्यवसायों का बंद होना, कॉर्पोरेट नौकरियों पर AI का प्रभाव और सरकारी नौकरियों का निजीकरण युवाओं को एक ही बंद रास्ते (सरकारी भर्ती परीक्षा) की ओर धकेल रहा है, जहाँ फिर से पेपर लीक हो जाते हैं।

विपक्ष और छात्रों की 3 प्रमुख मांगें

राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए निम्नलिखित तीन मांगों को तुरंत पूरा किया जाना चाहिए:

1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: इस पूरी विफलता के प्रतीक बन चुके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से तुरंत हटाया जाए।

2. हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, पेलेट गन और बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों और इसका आदेश देने वालों की जवाबदेही तय कर उन्हें दंडित किया जाए।

3. प्रधानमंत्री की सार्वजनिक माफी: इस बदहाली और छात्रों के साथ हुए खिलवाड़ के लिए व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।

“पुलिसकर्मी भी बदलाव चाहते हैं” — राहुल का दावा

प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और चोटिल किए जाने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का नेता होने के नाते देश की जनता की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है और उन्हें ऐसी हरकतों से कोई डर नहीं लगता।

उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि जब पुलिसकर्मी उन्हें घसीटकर बस में ले जा रहे थे, तब खुद पुलिसकर्मियों ने उनके कान में फुसफुसाकर कहा कि “हम सिर्फ वर्दी पहने हैं, इस सरकार को हटाइए।” राहुल गांधी के अनुसार, पुलिसकर्मी भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतने ही चिंतित हैं।

मुद्दे से भटकने नहीं देगा विपक्ष

सरकार पर ध्यान भटकाने (Distraction) का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को कालीन के नीचे दबाना चाहती है, लेकिन विपक्ष इसे मुख्य एजेंडा बनाए रखेगा। संसद के संचालन को लेकर उन्होंने कहा कि संसद चलने या न चलने का फैसला विपक्षी दलों की साझा बैठक में लिया जाएगा, लेकिन छात्रों के न्याय के सवाल पर कोई समझौता नहीं होगा।

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