सड़क पर ज्ञान… खुद नियमों का संहार! नगर परिषद डेहरी के अभियंता की गाड़ी का कब कटेगा चालान?

जन आक्रोश मीडिया | डेहरी ऑन सोन

कहते हैं कि कानून की नजर में सब बराबर होते हैं। लेकिन जब बात सरकारी रसूख और प्रशासनिक कुर्सियों की आती है, तो नियम-कानून सिर्फ आम जनता की जेब ढीली करने का जरिया बनकर रह जाते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला रोहतास जिले के डेहरी से सामने आया है, जिसने नगर प्रशासन के दोहरे मापदंडों की पोल खोलकर रख दी है।

अतिक्रमण हटाने की नसीहत, लेकिन खुद ‘कानून से परे’

पिछले कुछ दिनों से नगर परिषद डेहरी के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) सरकारी गाड़ी में लाउडस्पीकर लगाकर शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं। उनका मकसद सराहनीय है—लोगों को नियम-कानून समझाना और यह हिदायत देना कि “सड़कों पर अतिक्रमण न करें।”

लेकिन विडंबना देखिए, दूसरों को अतिक्रमण हटाने और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले साहब जिस चमचमाती सरकारी स्कॉर्पियो (नंबर: BR 01 PJ 4767) में सवार होकर घूम रहे हैं, वह खुद सालों से कानून की धज्ज़ियां उड़ा रही है। गाड़ी के आगे बड़े-बड़े अक्षरों में “नगर प्रशासन” का बोर्ड तो टंगा है, लेकिन गाड़ी के जरूरी कागजात गायब हैं।

5 साल से बिना इंश्योरेंस और बिना HSRP के दौड़ रहा है वाहन

एमपरिवहन (mParivahan) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नगर परिषद डेहरी की इस गाड़ी का कानूनी स्टेटस सालों पहले समाप्त हो चुका है:

सड़क पर सरपट दौड़ती कार्यपालक अभियंता की गाड़ी
  1. नो इंश्योरेंस (Expired Insurance): इस सरकारी वाहन का बीमा 09 अगस्त 2021 को ही खत्म हो चुका है। यानी पिछले करीब 5 वर्षों से यह गाड़ी बिना किसी वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर सरेआम दौड़ रही है।
  2. बिना हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट (No HSRP): परिवहन विभाग के सख्त निर्देशों के बावजूद इस गाड़ी पर अब तक हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं लगाई गई है, जो कि अब हर वाहन के लिए अनिवार्य है।
  3. प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) नदारद: डिजिटल रिकॉर्ड में गाड़ी के पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का स्टेटस भी ‘NA’ (नॉट अवेलेबल) दिखा रहा है।

यदि यही भूल कोई ‘आम आदमी’ करता, तो क्या होता?

अब जरा सिक्के का दूसरा पहलू देखिए। अगर नगर परिषद के साहब की जगह डेहरी का कोई आम नागरिक, कोई ठेले वाला, या कोई मध्यमवर्गीय परिवार का व्यक्ति इस तरह गाड़ी चला रहा होता, तो रोहतास पुलिस और परिवहन विभाग उस पर कहर ढा देता:

  • बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत पहली बार पकड़े जाने पर ₹2,000 का जुर्माना या 3 महीने की जेल (या दोनों) का प्रावधान है।
  • बिना HSRP नंबर प्लेट पर: केंद्रीय मोटर वाहन नियम के उल्लंघन में सीधे ₹5,000 का तगड़ा जुर्माना ठोक दिया जाता है।
  • बिना PUCC (प्रदूषण सर्टिफिकेट) पर: ₹10,000 तक के चालान का नियम है।
गाड़ी के फेल PUCC और Insurance की गवाही

यानी एक आम आदमी अगर इस स्थिति में गाड़ी लेकर सड़क पर निकल जाए, तो पुलिस उसकी गाड़ी को तुरंत जब्त (Impound) कर लेती और उस पर कम से कम ₹15,000 से ₹17,000 तक का जुर्माना लगा दिया जाता।

माननीय अदालत की टिप्पणी और ‘समानता का अधिकार’

साल 2023 में माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली ने एक सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि “प्रशासनिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों के प्रति पूरी तरह अभिज्ञ (जागरूक और अनुशासित) रहें।” जब कानून लागू करने वाली एजेंसियां ही खुद नियमों को ताक पर रख देंगी, तो आम जनता से अनुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

संविधान हमें ‘समानता का अधिकार’ देता है। जन आक्रोश मीडिया स्थानीय प्रशासन, जिला पदाधिकारी रोहतास (@dm_rohtas), एसडीएम डेहरी (@SDM_Dehri) और रोहतास पुलिस (@RohtasPolice) से यह सीधा सवाल पूछता है कि क्या इस ‘नगर प्रशासन’ लिखी गाड़ी का भी उसी निष्पक्षता से चालान काटा जाएगा, जिससे एक आम जनता का काटा जाता है? या फिर नियम केवल गरीबों और आम नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए ही बनाए गए हैं?

देखना दिलचस्प होगा कि जनता को अतिक्रमण मुक्त शहर का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी खुद को इस कानूनी ‘अतिक्रमण’ से कब मुक्त कर पाते हैं और रोहतास ट्रैफिक पुलिस इस सरकारी गाड़ी का चालान कब काटती है! बाकी आपकी इस ख़बर पर क्या राय है Comment में साझा करें।

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