असर: 24 घंटे में झुका PNB डेहरी, शिकायत के बाद बच्ची को मिला सुकन्या खाते का हक

PNB डेहरी में सुकन्या समृद्धि खाते को लेकर हुई मनमानी पर जन आक्रोश की खबर और PGPortal शिकायत का बड़ा असर। 24 घंटे में बैंक ने मानी गलती, दिया लिखित जवाब।

डेहरी-ऑन-सोन (जन आक्रोश मीडिया): जागरूक नागरिक अगर अपने अधिकारों के लिए सही मंच पर आवाज़ उठाएं, तो बड़े से बड़े सिस्टम को झुकना ही पड़ता है। डेहरी-ऑन-सोन के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) को लेकर की गई मनमानी का मामला अब सुलझ गया है। जन आक्रोश मीडिया की ‘डिजिटल गांधीगिरी’ और वित्त मंत्रालय के PGPortal पर की गई शिकायत का असर यह हुआ कि महज़ 24 घंटे के भीतर बैंक प्रबंधन बैकफुट पर आ गया और शिकायतकर्ता को लिखित पत्र भेजकर ससम्मान खाता खोलने के लिए आमंत्रित किया है।

क्या था पूरा मामला?

ज्ञात हो कि 27 अप्रैल को डेहरी निवासी सुनील कुमार अपनी 8 वर्षीय पुत्री का सुकन्या खाता खुलवाने PNB शाखा गए थे। बच्ची उनकी तीसरी संतान और पहली पुत्री होने के कारण नियमों के तहत 100% पात्र थी। लेकिन, वहां मौजूद कर्मचारी ने नियमों की गलत व्याख्या करते हुए और भारत सरकार के राजपत्र (Gazette) को देखने से इनकार करते हुए, उन्हें बैरंग लौटा दिया था।

24 घंटे में कैसे पलटा फैसला?

कर्मचारी के इस अड़ियल रवैये के बाद सुनील कुमार ने जन आक्रोश मीडिया के संपादक मो० दिलशाद आलम के सहयोग से उसी दिन ‘पब्लिक ग्रीवांस पोर्टल’ (PGPortal) पर वित्त मंत्रालय और PNB के आला अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

शिकायत पहुंचते ही सिस्टम में हड़कंप मच गया। मामला तुरंत PNB के औरंगाबाद सर्किल ऑफिस और पटना जोनल ऑफिस पहुंच गया। उच्च अधिकारियों के निर्देश और फटकार के बाद, अगले ही दिन (28 अप्रैल) डेहरी शाखा के ‘हॉल-इन-चार्ज’ को सुनील कुमार के नाम एक आधिकारिक पत्र जारी करना पड़ा।

‘तकनीकी समस्या’ का लिया गया सहारा

मज़ेदार बात यह है कि बैंक ने अपनी किरकिरी से बचने और कर्मचारी की अज्ञानता को छिपाने के लिए पत्र में एक आम सरकारी बहाने का सहारा लिया है। पत्र में लिखा गया है कि उस दिन खाता खोलने में कुछ “तकनीकी समस्या (Technical Issue)” आ गई थी। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया है कि “मामला सर्किल ऑफिस तक गया था और अब सिस्टम में अनुमति मिल गई है, इसलिए आप आकर अपनी पुत्री का सुकन्या खाता खुलवा लें।”

कारण चाहे जो भी बताया गया हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि उच्चाधिकारियों के दबाव में ही डेहरी शाखा की नींद टूटी है।

जनता के लिए एक बड़ी सीख

यह घटना डेहरी और आस-पास के सभी नागरिकों के लिए एक मिसाल है। सरकारी योजनाओं का लाभ देना बैंक कर्मचारियों का कर्तव्य है, कोई एहसान नहीं। जब भी कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों का हवाला देकर आपको गुमराह करे, तो निराश होकर लौटने के बजाय सरकारी राजपत्र पढ़ें और PGPortal जैसे सशक्त माध्यमों का उपयोग करें।

सुनील कुमार और उनकी बच्ची को इस जीत के लिए बधाई। जन आक्रोश मीडिया आगे भी आम जनमानस के हकों की आवाज़ पूरी बेबाकी से उठाता रहेगा।

हमें सपोर्ट करने और लोगों को जागरूक करने के लिए इस ख़बर को ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को शेयर करें। यदि आपकी भी कोई समस्या सिस्टम को लेकर है तो हमें 9135650559 पर संपर्क करें।

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